क्या पावर ऑफ अटॉर्नी द्वारा सेल डीड बेचे जा सकते हैं?

Last Updated at: Sep 12, 2020
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2019 के एक फैसले मे सुप्रीम कोर्ट ने डीसीजन दिया है कि पावर ऑफ अटॉर्नी (पीओए) के माध्यम से किए गए प्रापर्टी ट्रांसफर लीगल नहीं होंगे। इसलिए यदि आप पीओए वाले किसी व्यक्ति से प्रापर्टी खरीदते हैं तो पहले के ओनर को अभी भी टाइटल होल्डर माना जाएगा|

पावर ऑफ अटॉर्नी

2011 में सुप्रीम कोर्ट (एससी) ने कहा कि जनरल पावर ऑफ अटॉर्नी के माध्यम से प्रापर्टी टाइटल को ट्रांसफर करना वेलिड नहीं है। इससे पहले कि हम सुप्रीम कोर्ट के आदेश में एब्जार्ब्ड़ हो जाएं| और जनरल पावर अटॉर्नी के माध्यम से प्रापर्टी से रिलेटेड इलीगल की एक्सप्लेन करें | आइए पहले समझते हैं कि जनरल पावर ऑफ अटॉर्नी क्या है|

पॉवर ऑफ़ एटर्नी क्या है?

एक रिटेन डाक्यूमेंट जिसमें एक व्यक्ति को द प्रिंसिपल के रूप में जाना जाता है  किसी दूसरे व्यक्ति को उसकी ओर से एक एजेंट के रूप में कार्य करने के लिए अपाइंत करता है|  इस प्रकार प्रिंसिपल की ओर से कुछ कार्यों को करने के लिए एजेंट पर राइट देता है। अटॉर्नी की पावर रिगूलर रूप से प्रिंसिपल के लिए विभिन्न प्रकार के लेनदेन की देखभाल करते है जिसके लिए अनुमति  दी जाती हैं  जैसे कि स्टॉक पावर एक्ज्क्युटेड करना, टैक्स लेखा परीक्षा संभालना या सेफ डिपाजीट बॉक्स को बनाए रखना होता है । अटॉर्नी की शक्तियां सामान्य (पूर्ण) या विशेष परिस्थितियों तक लिमिटेड होने के लिए रिटेन की जा सकती हैं। चीफ़ जस्टिक के देथ या डिसएबल होने पर जनरली अटॉर्नी की पावर ख़तम हो जाती है लेकिन प्रिंसिपल किसी भी समय अटॉर्नी के पावर को कैंसल कर सकता है।

लीगल एडवाइस लें

  1. 100 रुपये के स्टाम्प पेपर पर पावर ऑफ़ अटॉर्नी टर्म्स लिखवाएं|
  1. अपने रेजीडेंस प्लेस के रजिस्ट्रार (जनरली पर डिप्युटी रजिस्टर के ऑफिस के रूप में जाना जाता है) के ऑफिस पर जाएँ।
  2. रजिस्ट्रार के ऑफिस को रजिस्ट्रार के सामने पावर ऑफ अटॉर्नी पर हस्ताक्षर करने के लिए 2 अटेस्टर की आवश्यकता होगी।
  3. सेल्फ अटेस्टेड ओरिजनल डॉक्यूमेंट से एड्रेस प्रूफ, वोटर आईडी कार्ड, पासपोर्ट, आधार कार्ड अपनी फोटोकॉपी के साथ ले जाएं।
  4. रजिस्ट्रार गवर्नमेंट रिकॉर्ड में पावर ऑफ अटॉर्नी होल्डर और अटेस्टर को आपकी एक फोटो पर क्लिक करेगा।
  5. रजिस्ट्रार गवर्नमेंट रिकॉर्ड में पावर ऑफ अटॉर्नी की एक कॉपी रखेगा और आपको अपने ऑफिस की रजिस्ट्री की मुहर प्रदान करेगा।इस समय आपका इजी पावर ऑफ़ अटॉर्नी ‘ रजिस्टर्ड पावर ऑफ़ अटॉर्नी ‘ बन जाता है ।

पावर ऑफ अटॉर्नी और रियल एस्टेट

अब हमने देखा है कि पावर ऑफ अटॉर्नी क्या है और इसके पीछे कानूनी प्रक्रिया क्या है। जब संपत्ति खरीदने या बेचने की बात आती है तो पावर ऑफ अटॉर्नी प्रापर्टी टाइटल ट्रांसफर करने के लिए एक लीगल मीन्स नहीं है। हालांकि जनरल पावर ऑफ अटॉर्नी के माध्यम से प्रापर्टी सेल भारतीय शहरों में कामन प्रेक्टिस बन गया था  जो कि बायर और सेलर दोनों को दिए गए मोनेटरी बेनीफिट के कारण था।

प्रापर्टी टाइटल ट्रांसफर करने के लिए एक सेल डीड किया जाना चाहिए |  जिसके बाद बायर को स्टाम्प फीस और रजिस्ट्रेशन फीस का पेमेंट करना होता है।  सेलर को ट्रांजैक्सन पर कैपिटल गैन टैक्स का बरडेन भी उठाना होता है । एक जनरल अटॉर्नी के माध्यम से प्रापर्टी टाइटल ट्रांसफर करके इन क्लेम से बचा जा सकता है। सेलर्स अप्रोच से  एक जनरल पावर ऑफ अटॉर्नी ट्रांजैक्सन को ले जाना पासिबल है  भले ही वे क्लियर प्रापर्टी टाइटल नहीं रखते हों ।  जनरल पावर अटॉर्नी  रियल में  उनका वनलि आप्शन है।  बायर के वीव से  वे मार्केट वेलयु से बहुत सस्ती रेट पर प्रापर्टी खरीद सकते हैं।

लीगली  कृषि लैंड को लैंड यूज में चेंज किए बिना रेजीडेंसिएल परपज के लिए बेचा नहीं जा सकता था । मोस्टली लैंड ओनर अपने लैंड पार्सल को बिना बदले में बेच देते हैं,  जिसे वे ट्रांसफर की लीगल ट्रबुल कहते हैं और जनरल पावर ऑफ़ अटॉर्नी के माध्यम से अपने लैंड पार्सल बेचते हैं।