कैसे फाइल करें भारत में क्रिमिनल कंप्लेंट

Last Updated at: Nov 17, 2020
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क्रिमिनल कंप्लेंट

क्या आप कोई क्रिमिनल कंप्लेंट करना चाहते हैं ? इस ब्लॉग को जरूर पढ़िए, यह आपको क्रिमिनल कंप्लेंट फाइल करने में सहायक होगा|

एफआईआर एंटर करना

जी हाँ आप अपनी नजदीकी पुलिस स्टेशन में एफआईआर फाइल करें।  यह आप ऑनलाइन भी फ़ाइल कर सकते हैं। पुलिस  इन्फार्मेशन मिलने पर  एक रिटेन डाकुमेंट  तैयार करती है  जिसे फ़र्स्ट इन्फार्मेशन रिपोर्ट (एफआईआर) के रूप में जाना जाता है। पुलिस की ड्यूटी डिस्ट्रेस और आगे की कार्रवाई के लिए उसे डिस्ट्रिक्ट मजिस्ट्रेट को इन्सट्रक्शन देने की होती है।  आप उस व्यक्ति के अगेन्स्ट एफआईआर एंटर कर सकते हैं जिसने  आपके अगेन्स्ट क्राइम किया हैं या आप उस क्राइम के बारे में जानते हैं जो क्राइम किया गया है।  एफआईआर एंटर करने के लिए कोई फीस नहीं ली जाती है| यह न्याय प्राप्त करने के लिए महत्वपूर्ण डाकुमेंट  होता है अब मुफ़्त कानूनी सलाह प्राप्त करें

अगर आपकी एफआईआर एंटर नहीं हुई तो आप क्या कर सकते हैं?

एफआईआर एंटर नहीं करना इलीगल है। आवेलेबल सोल्युशन इस प्रकार हैं |
1. आप पुलिस अधीक्षक ( एस ॰ पी ॰ )या अन्य उच्च अधिकारियों जैसे पुलिस उपमहानिरीक्षक (डी॰ सी ॰पी॰) और पुलिस महानिरीक्षक (आई ॰ जी॰ ) से मिल सकते हैं और अपनी कम्पलेन उनके कंसिडरेशन में ला सकते हैं।
2. आप अपनी कम्पलेन रिटेन में और डाक से रिलेटेड सुपरिटेंडेंट ऑफ पुलिस को भेज सकते हैं। यदि सुपरिटेंडेंट ऑफ पुलिस आपकी कम्पलेन से सेटीस्फाइ हैं  तो वह या तो मामले की सेल्फ चेक करेगा या चेक करने का ऑर्डर देगा।
3.कोर्ट के जूरीडिक्सन में आने से पहले आप एक प्राइवेट  कम्पलेन एंटर कर सकते हैं।
4. आप भी अगर पुलिस स्टेट ह्यूमन राइट्स कमीशन या नेशनल ह्यूमन राइट्स कमीशन के पास कम्पलेन कर सकते हैं

एफआईआर एंटर करने के बाद अगला स्टेप क्या है?

पुलिस  इंस्पेक्सन  करती है  जिसमें आरेस्ट इंकलुड़ हो सकती है। एक बार इंस्पेक्सन एंड हो जाने के बाद पुलिस अपने सभी रिजल्ट को एक  इनवाइस या चार्जशीट में एंटर  करेगी । यदि यह समझा जाता है कि चार्जशीट पर पर्याप्त प्रूफ है तो मैटर कोर्ट  में चला जाता है। फ़्लिपसाइड पर उनकी इंस्पेक्सन के बाद यदि पुलिस यह डीसीजन  निकालती  है कि एनफ़ प्रूफ नहीं है कि क्राइम किया गया है तो वे मैटर को बंद कर सकते हैं कोर्ट में उनके रीजन्स को करेक्ट ठहरा रहे हैं। यदि पुलिस मैटर को क्लोज करने का डीसीजन लेती है  तो वे उस व्यक्ति को इंफार्म करने के लिए बाउंड होते हैं जिन्होंने अपने फैसले की प्राथमिकी दर्ज की थी।

चेक बाउंस कंप्लेंट

जीरो एफआईआर क्या है और इसका यूज कब किया जाना चाहिए?

मर्डर , रेप  आदि  क्राइम्स के लिए एक जीरो एफआईआर का उपयोग किया जाता है , जहां इमिडीएट चेक की आवश्यकता होती है और पुलिस स्टेशन तक पहुंचने में समय वेस्ट नहीं किया जा सकता है  जिसके जुरिस्डिक्शन में क्राइम होता है। जीरो एफआईआर का मेन आइडिया  इंसपेकशन स्टार्ट करना है या पुलिस से अपनी इनिशिएल एक्शन करने का रिक्वेस्ट करना है। एक बार जीरो एफआईआर एंटर कराने के बाद  श्योर करें कि आपकी कम्पलेन आपके जुरिस्डिक्शन में किसी भी इनिशिएल एक्शन या जांच के  बिना सूटेबल पुलिस स्टेशन में मुव्ड़ नहीं की गई है। क्राइम्स  के लिए जीरो एफआईआर आवश्यक है जहां इमिडीएट एक्शन की आवश्यकता होती है  जैसे मर्डर के मामले में , रेप आदि  या जब पुलिस स्टेशन जिसके जुरिस्डिक्शन में क्राइम्स किया गया था इजीली से असेसिबल नहीं है  जैसे कि जर्नी के पिरिएड क्राइम के जब कोई मैटर होते है|

क्राइम कम्पलेन – प्लेंटिफ

जब एक चार्ज़्ड़ के अगेन्स्ड क्रिमिनल कंप्लेंट एंटर किया जाता है तो इसके लिए कम्पलेनेंट द्वारा प्रजेंट डाकुमेंट होना चाहिए । कामन मैन की लङ्ग्वेज में यह केवल कम्पलेनेंट के रिटेन क्लेम हैं और इसमें उस मामले के फ़ैक्ट का समरी होता है जिसे वह प्रजेंट करना चाहता है जो रिलीफ़ वह चाहता है।