एक भारतीय फोरेनर से भारत में कैसे शादी कर सकता है

Last Updated at: December 11, 2019
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यदि आप अपने साथी के बिना नहीं रह सकते जो किसी दूसरे देश में किसी अन्य महाद्वीप में रहते हैं, तो उसके साथ एकजुट कैसे होंगे यह जानने के लिए इस लेख को पढ़े। जब आपको यह महसूस होता है कि आपके जीवनसाथी में प्यार, अनुकूलता और एकजुटता की भावना है तब यह समय होता है कि आप अपने रिश्ते को कानूनी प्रक्रिया के जरीए रिश्ते में बदल सकतें हैं। भारत में, इस तरह के विवाह को विशेष विवाह अधिनियम के प्रावधानों द्वारा नियंत्रित किया जाता है। यह अधिनियम न केवल विभिन्न धर्मों के लोगों बल्कि विभिन्न जाति या पृष्ठभूमि के लोगों के बीच विवाह से संबंधित है । अन्य राष्ट्रीयता के व्यक्ति से शादी करना विशेष विवाह अधिनियम के अंतर्गत होते हैं। हमें यह भी उजागर करना चाहिए कि एक भारतीय नागरिक का भारत से बाहर विवाह करने का इरादा है, तो यह 1969 में पारित विदेशी विवाह अधिनियम के प्रावधान में लागू होते हैं।

चूंकि भारत में लड़कियों के लिए विवाह की कानूनी उम्र 18 वर्ष है और लड़कों के लिए 21 वर्ष है, यही नियम विदेशी नागरिक के साथ विवाह करने पर भी लागू होते हैं। यद्यपि उनके देश का घरेलू कानून विवाह के लिए उच्च या निम्न आयु निर्धारित कर सकता है। आयु सीमा को निर्धारित करने के अलावा विशेष विवाह अधिनियम में निषिद्ध रिश्तों जैसे माताओं, सौतेली माँ, दादी और सौतेली माँ आदि की डिग्री का भी उल्लेख किया गया है।

केंद्रीय सूचना आयोग ने विशेष विवाह अधिनियम की प्रयोज्यता पर महत्व देते हुए यह भी स्पष्ट रूप से साफ किया है कि यदि दूल्हा और दुल्हन अगल-अलग धर्मों या देशों के हैं, तो उन्हें विशेष विवाह अधिनियम, 1954 के तहत विवाह करना होगा क्योंकि उन्हें परंपरागत वैवाहिक कानूनों के तहत शादी करने की अनुमति नहीं है। कुछ लोग अपने धार्मिक रीति-रिवाजों के अनुसार विवाह करने की इच्छा नहीं रखते हैं और विशेष विवाह अधिनियम के तहत विवाह करना पसंद करते हैं। भारत में 30 दिन के नोटिस की आवश्यकता होती है यदि एक साथी स्थायी रूप से और दूसरा साथी अस्थायी रूप से भारत में रहता है। भारतीय और एक विदेशी नागरिक के बीच विवाह भी इस अधिनियम के तहत पंजीकृत होंगे। यदि एक साथी विदेशी देश में रहता है, तो भारत में मैरिज नोटिस फॉर्म को भागीदार द्वारा भरना होता है और साथ ही विदेशी देश में साझेदार द्वारा भारत में पंजीकरण कार्यालय में साझेदार द्वारा फिर से जमा कराना होता है।

दस्तावेजों, औपचारिकताओं, और प्रमाणपत्रों की आवश्यकता

अपनी शादी का उत्सव मनाने से पहले, आपको यह सुनिश्चित करना चाहिए कि आपके निम्नलिखित दस्तावेज तैयार हैं:

  1. जन्म प्रमाण पत्र (आयु प्रमाण के लिए)
  2. विदेशी नागरिक के लिए तीस दिनों से अधिक का वैध वीजा
  3. दोनों पक्षों द्वारा हस्ताक्षरित एक एकल स्थिति हलफनामा। यदि दोनों पक्षों में से एक ने पहले से शादी कर ली है, तो तलाक का फैसला (तलाक के लिए) या मृत्यु का प्रमाण पत्र (विधवा के लिए) आवश्यक है।
  4. एड्रेस प्रूफ और पासपोर्ट साइज फोटोग्राफ
  5. भारत में 30-दिवसीय निवास के पर्याप्त दस्तावेजी साक्ष्य
  6. ‘अनापत्ति’ पत्र -उदाहरण के लिए, यदि कोई अमेरिकी नागरिक एक सिविल विवाह समारोह के मुताबिक शादी करना चाहता है, तो उसे विवाह अधिकारी को अमेरिकी दूतावास से एक अनापत्ति पत्र या वाणिज्य दूतावास और अगर वह पहले किसी विवाह में शामिल है तो पिछले विवाह की समाप्ति के प्रमाण प्रस्तुत करना होगा । इसी प्रकार, किसी अन्य विदेशी देश के नागरिक को अपने देश के दूतावास या वाणिज्य दूतावास से अनापत्ति पत्र प्रस्तुत करना आवश्यक है। दोनों पक्षों को विवाह को औपचारिक रूप देने के लिए प्रारंभिक आवेदन की तारीख से कम से कम 30 दिन तक का इंतजार करना पड़ता है ताकि विवाह अधिकारी कोई  नोटिस प्रकाशित न कर सकें, जिससे शादी के लिए किसी भी आपत्ति के लिए एक अवसर भी शामिल हो।

क्या रसमों, रिवाजों और समारोहों का प्रदर्शन पर्याप्त है?

चाहे हम भारत में धूम-धाम से एक विवाह को सभी अनुष्ठानों के साथ करते हैं लेकिन कोई भी जोड़ा चाहे वह भारतीय हो, एनआरआई हो या कोई विदेशी जो भारत में शादी करना चाहता है, उसे या तो धार्मिक विवाह करना है समारोह या नागरिक विवाह समारोह करना अनिवार्य हैं। भले ही विवाह हिंदू विवाह अधिनियम, मुस्लिम विवाह अधिनियम, ईसाई विवाह अधिनियम और पारसी विवाह और तलाक अधिनियम के तहत मनाया जाता है। भारत में इस तरह का धार्मिक विवाह समारोह कानूनी रूप से वैध विवाह माना गया है लेकिन इसे अनिवार्य रूप से रजिस्टर करने की आवश्यकता है। वीजा और किसी दूसरे देश में बसने के उद्देश्यों के लिए विवाह के रजिस्ट्रार से एक विवाह प्रमाणपत्र आवश्यकता है। आपका विवाह रजिस्टर होना पर्याप्त नहीं हो सकता है और आपको अक्सर रेजिस्ट्रेशन प्रमाणपत्र प्रस्तुत करने की आवश्यकता होती है जो विवाह के वैध रेजिस्ट्रेशन के पर्याप्त प्रमाण के रूप में कार्य करता है। इस प्रमाण पत्र और रजिस्टर विवाह की समाप्ति की कोई अवधि नहीं है, जैसे विवाह का कोई अन्य रूप तलाक प्राप्त होने तक मान्य है।

संपत्ति का उत्तराधिकार:

जब भारत में विभिन्न राष्ट्रीयताओं से संबंधित पक्ष विवाह करते हैं तो उत्तराधिकार स्वाभाविक रूप से भारतीय कानूनों द्वारा शासित होता है। यह भारतीय उत्तराधिकार अधिनियम है जो उत्तराधिकार तय करने के लिए लागू नियमों को निर्धारित करता है। हालाँकि, यदि दोनों पक्ष (विभिन्न राष्ट्रीयताओं से संबंधित होने के बावजूद) हिंदू हैं, तो यह हिंदू उत्तराधिकार अधिनियम के प्रावधान हैं जो इसके बजाय लागू होंगे।

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