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स्थायी पेटेंट

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पेटेंट फाइलिंग क्यों जरूरी है?

पेटेंट फाइलिंग एक पहला कदम है जो एक आविष्कारक अपने आविष्कार
को दुरुपयोग से बचाने के लिए लेता है। भारत में पेटेंट दाखिल करना काफी जटिल प्रक्रिया है, हालांकि, सही कानूनी मार्गदर्शन के साथ
इसे आसानी से किया जा सकता है।

पूर्व कला खोज

एक पेटेंट अटॉर्नी पूरी तरह से करेगा
पेटेंट डेटाबेस की खोज करेगा।

चरण 1

स्वीकृति की संभावना

वकील समान कार्यों के साथ तुलना के माध्यम से आविष्कारशीलता का आकलन करेंगे

चरण 2

आवेदन दाखिल करना

आवेदन को सहबद्ध द्वारा ड्राफ्ट किया जाएगा
और पेटेंट कार्यालय के साथ दायर किया जाएगा।

चरण 3

पूर्व कला खोज

एक पेटेंट अटॉर्नी पूरी तरह से करेगा
पेटेंट डेटाबेस की खोज करेगा।

स्वीकृति की संभावना

वकील समान कार्यों के साथ तुलना के माध्यम से आविष्कारशीलता का आकलन करेंगे

आवेदन दाखिल करना

आवेदन को सहबद्ध द्वारा ड्राफ्ट किया जाएगा
और पेटेंट कार्यालय के साथ दायर किया जाएगा।

पेटेंट क्या है?


पेटेंट एक अधिकार है, जो किसी भी व्यक्ति या संस्था को नई तकनीकी, प्रक्रिया, उत्पाद या सेवा के लिए प्रदान किया जाता है, जिससे उसकी नकल न कर सकें। संक्षेप में कहें तो पेटेंट द्वारा बौद्धिक संपदा की एक निश्चित अवधि के लिए या फिर किसी भी आविष्कार का उपयोग या बेचने या खरीदने का अधिकार मिलता है। अर्थात् पेटेंट एक कानूनी अधिकार है, जिसकी मदद से व्यक्ति या संस्था के किसी भी उत्पाद या आविष्कार को दूसरा कोई नहीं चुरा सकता है।

पेटेंट, कॉपीराइट या ट्रेडमार्क जैसी किसी भी अन्य बौद्धिक संपदा की तरह ही आविष्कारक द्वारा बेची या ट्रांसफर की जा सकती है। वकील सर्च डॉट कॉम उन भारतीय आविष्कारकों की मदद करने के लिए पेटेंट फाइल करने की पूरी जानकारी लेकर आया है, जो अपनी बौद्धिक संपदा की रक्षा करना चाहते हैं। बता दें कि भारत में पेटेंट फाइल करने के लिए कई तरह की दस्तावेज़ों की आवश्यकता होती है, जोकि एक जटिल प्रक्रिया होती है, लेकिन वकील सर्च डॉट कॉम की मदद से यह प्रक्रिया आसान हो जाती है।

आप सभी को पता होना चाहिए

भारत में पेटेंट दाखिल करने के लाभ


नए आविष्कारों के लिए पेटेंट प्रोत्साहन का रुप है, जिसे फाइल करने के बाद आविष्कारक पूरी तरह से अपने उत्पाद का स्वामी बन जाता है। भारत में पेटेंट दाखिल करना आवश्यक है, क्योंकि यह दावेदारों को उनकी अनुमति के बिना आविष्कारों को बेचने, बनाने या आयात करने से रोकता है।

स्पष्ट कर दें कि पेटेंट, अन्य बौद्धिक संपदा की तरह ही आविष्कारक के द्वारा बेची या ट्रांसफर की जा सकती है। भारत में पेटेंट दाखिल करने की तारीख से अगले बीस सालों तक वैध रहती है, जिसके बाद यदि आविष्कारक को ज़रूरत है, तो वह फिर से दाखिल कर सकता है।

पेटेंट दाखिल करने के लाभ

पेटेंट, ब्रांड या उत्पाद को बेहतर बनाने के साथ ही आपके व्यवसाय को एक प्रीमियम चार्ज करने में सक्षम बनाता है। इसके अलावा पेटेंट दाखिल करने के निम्न लाभ होते हैं-

पेटेंट की मदद से आने वाले सालों में आपका व्यवसाय आपके प्रतिद्वंद्वियों को पीछे छोड़ते हुए राजस्व को बढ़ा सकता है।

पेटेंट के अन्य अधिकारों के साथ ही मालिक अपने आविष्कार का उपयोग अगले बीस सालों तक बिना किसी रुकावट के कर सकता है।

पेटेंट को संपत्ति की तरह ही बेचा या ख़रीदा जा सकता है, जिसका लाइसेंस मिलता है।

भारत में पेटेंट प्राप्त करने की पूरी प्रक्रिया


भारत में किसी भी व्यक्ति या संस्था को पेटेंट प्राप्त करने के लिए निम्नलिखित चरण से होकर गुजरना पड़ता है-

चरण 1: पेटेंट के लिए आवदेन दाखिल करना

विचार: सबसे पहले वांछित पेटेंट के बारे में तमाम जानकारी को एकत्रित करके एक पेपर पर लिखना है, ताकि कोई भी जानकारी छूट न जाए। बता दें कि ये तमाम जानकारी पेटेंट दाखिल कराने के लिए ज़रूरत होगी।

दृश्य: अपने विचारों या आरेखों के लिए ऐसे तत्वों की कल्पना करें, जोकि आपके आविष्कार को बेहतर ढंग से बताने में सक्षम हो।

सत्यापन:पेटेंट दाखिल करने के लिए आवेदन करने से पहले यह पूरी तरह से सुनिश्चित कर लें कि आपका आविष्कार पेटेंट भारतीय पेटेंट अधिनियम में परिभाषित किया गया है या नहीं। इसके अलावा आपको यह भी सत्यापित करना है कि आपका आविष्कार पेटेंट की निम्नलिखित आवश्यकताओं की पूर्ति करता है या नहीं-
- उपन्यास
- गैर-स्पष्टता
- उपयोग
- पेटेंट विषय वस्तु।

एक पेटेंट आवेदन का ड्राफ्ट तैयार करना कला है, जिसकी तैयारी आपको एक पेशेवर से ही करवाना चाहिए, ताकि आपको इसमें किसी भी तरह की कोई भी दिक्कत का सामना नहीं करना पड़ा।

चरण 2: पेटेंट रिपोर्ट की तैयारी: पेशेवर पेटेंट रिपोर्ट तैयार करने से पहले वांछित पेटेंट से जुड़ी तमाम तथ्यों को एकत्रित करेंगे या फिर उस पर रिसर्च करेंगे। दरअसल, पेशेवर पेटेंट आविष्कार से जुड़ी तमाम जानकारी को एकत्रित करेगा और यह सुनिश्चित करेगा कि वांछित पेटेंट मानदंडों पर ख़रा उतरता है या नहीं, जिसके बाद ही वह रिपोर्ट तैयार करेगा।

पेटेंट दाखिल करने से पहले अनंतिम पेटेंट क्यों अच्छा विचार है?

एक अनंतिम पेटेंट आपके कार्य व तिथि को सुरक्षित करता है। अर्थात अनंतिम पेटेंट तैयार होने के बाद आपका कोई प्रतियोगी सामान आविष्कार के लिए पेटेंट दाखिल नहीं कर सकता है।

  • भारतीय पेटेंट अधिनियम यही सुरक्षित करता है कि अनंतिम पेटेंट को ही स्थायी पेटेंट दिया जाए। आपके आविष्कार की पूरी जानकारी के लिए 12 महीने का समय दिया जाता है, जिसके बाद ही आवेदन को बंद किया जाता है।
  • स्थायी पेटेंट की तुलना में अनंतिम पेटेंट में लागत और संसाधन कम है, लेकिन इससे आप आविष्कार की बाज़ार क्षमता का आकलन करता है।
  • अनंतिम पेटेंट के ज़रिए आप पूरी जानकारी निकाल सकते हैं, जिसके बाद स्थायी पेटेंट के बारे में सोच सकते हैं।

चरण 3: पेटेंट आवेदन का प्रकाशन: आवेदन 18 महीने के बाद प्रकाशित किया जाता है। साथ ही इस दौरान निर्धारित शुल्क के साथ आवेदन जल्द भरने का अनुरोध भी किया जा सकता है।

अपने आविष्कार को पेटेंट करा कर पैसे कैसे कमाएं?

एक पेटेंट धारक अपने आविष्कार के पेटेंट से निम्न तरीके से पैसे कमा सकता है-

एक पेटेंट मालिक अपने विचार का दूसरे को लाइसेंस दे सकता है, जिसके साथ ही लाइसेंस धारी को आविष्कार बेचने या बनाने का अधिकार दे सकता है। दूसरे को अपने आविष्कार का अधिकार देने की वजह से पेटेंट मालिक रॉयल्टी लेता है, जिससे उसकी कमाई होती है।

पेटेंट को किसी और को बेचकर अच्छी ख़ासी कमाई की जा सकती है, जिसके लिए मालिक को मुंह मांगा पैसा मिलता है।

दाखिल पेटेंट का प्रकाशन


भारतीय पेटेंट कार्यालय प्रत्येक आवेदन को तब तक गोपनीय रखता है, जब तक पेटेंट आधिकारिक रुप से प्रकाशित नहीं हो जाता है। दाखिल किए गए पेटेंट का प्रकाशन 18 महीने के बाद खुद ब खुद हो जाता है, जिसके लिए आविष्कारक को कुछ भी नहीं करना पड़ता है।

अग्रिम में प्रकाशित किए गए पेटेंट को प्राप्त करने के लिए आविष्कारक को एक अनुरोध करना होता है, जिसके एक महीने बाद ही पेटेंट प्रकाशित हो जाता है। साथ ही बता दें कि पेटेंट के प्रकाशन की तारीख महत्वपूर्ण होती है, क्योंकि तभी आविष्कारक को कानूनी रुप से प्रकाशित करने का अधिकार प्राप्त होता है।

भारत में लाइसेंस धारी पेटेंट एजेंट


भारत में एक लाइसेंस धारी पेटेंट एजेंट पेटेंट कार्यालय में कार्यरत व्यक्ति की तरह ही पंजीकृत होता है। पेटेंट एजेंट फॉर्म भरने, मुकदमा चलाने या कार्यालय से संपर्क करने में आविष्कारकों की मदद करता है।

भारत में पेटेंट एजेंट बनने के लिए व्यक्ति की उम्र 21 साल होनी चाहिए। साथ ही वह भारतीय नागरिक होना चाहिए। इसके अलावा वह पेटेंट एजेंट की परीक्षा में सफल होना चाहिए। उपरोक्त योग्यता के आधार पर ही कोई व्यक्ति पेटेंट एजेंट बन सकता है।

बताते चलें कि पेटेंट एजेंट के पास यह अधिकार होता है कि वह पेटेंट आवेदन को स्वीकार करें या नहीं। इतना ही नहीं, कई बार पेटेंट आवेदन में संसोधित करने की आवश्यकता पड़ती है, तो यह पूरी तरह से एजेंट पर निर्भर करता है कि वह करेगा या नहीं।

पेटेंट एजेंट और पेटेंट वकील में अंतर


यूं तो पेटेंट एजेंट और वकील में ज्यादा फर्क नहीं है, लेकिन फिर भी दोनों के काम बिल्कुल विपरीत होते हैं। दरअसल, पेटेंट वकील कानूनी रुप से बौद्धिक संपदा, उल्लंघन या कानून की अदालत में दूसरों का प्रतिनिधित्व करने की सलाह के योग्य हैं। साथ ही पेटेंट वकील बार काउंसिल के साथ पंजीकृत होते हैं, लेकिन पेटेंट एजेंट तकनीकी क्षेत्र में भी सक्षम होते हैं।

पेटेंट फाइल प्रक्रिया में वकील सर्च कैसे आपकी मदद कर सकता है?

वकील सर्च पेटेंट देने से लेकर आवेदन दाखिल करने तक निम्नलिखित चरण में आपकी हर संभव मदद कर सकता है-

1.विवरण की जांच: सबसे पहले हम आविष्कार से जुड़ी तमाम विवरणों की जांच करेंगे, जिसमें उपयोग, उत्पाद और लाभ आदि शामिल होगा।

2.आवेदन की तैयारी: हम एक सत्यापित वकील से आपके द्वारा दी गई विवरणों के आधार पर आवेदन का खाका तैयार करवाएंगे, जिसमें आपकी निजी जानकारी के साथ साथ आविष्कार की जानकारी शामिल होगी।

3. आवेदन की निगरानी: हम आपके आवेदन को रजिस्ट्रार में दाखिल करेंगे, जिसके बाद स्वीकृति मिलने तक निगरानी करेंगे। यदि आपके पेटेंट को स्वीकृति मिल गई तो आप इसका उपयोग अगले साल से बीस सालों तक कर सकेंगे।

भारत में पेटेंट आवेदन के प्रकार


यूं तो भारत में पेटेंट आवेदन के कई प्रकार हो सकते हैं, जिसमें से कुछ प्रचलित प्रकार की जानकारी निम्नलिखित है-

साधारण आवेदन

भारतीय पेटेंट कार्यालय में प्रक्रिया के तहत किसी भी संदर्भ में बिना प्राथमिकता का दावा किए हुए साधारण आवेदन दाखिल किया जाता है। ध्यान रखने की बात यह है कि साधारण तिथि और प्राथमिकता की तिथि समान होनी चाहिए। बता दें कि साधारण आवेदन पूर्ण निर्देशों और दावों के साथ दायर किया जाता है।

पारंपरिक आवेदन

जब एक आवेदन पहले से ही किसी दूसरे देश में दाखिल हो और फिर भारत में उसी आविष्कार के लिए आवेदन दाखिल करने की प्रक्रिया को पारंपरिक आवेदन कहते हैं। ध्यान रखें कि पहले आवेदन की तिथि के 12 महीने के भीतर ही पारंपरिक आवेदन किया जा सकता है।

पीसीटी राष्ट्रीय आवेदन

यदि आप पीसीटी राष्ट्रीय चरण आवेदन दाखिल करना चाहते हैं, तो विदेश में दाखिल किए गए आवेदन के 31 महीने के भीतर कर सकते हैं।

पीसीटी इंटरनेशनल आवेदन

यदि आप कई देशों में अपनी प्राथमिकता का दावा प्रस्तुत करना चाहते हैं, तो आपको एक पीसीटी आवेदन की ज़रूरत होती है, जोकि 142 देशों में दावा करने का अधिकार देता है। बता दें कि प्रत्येक देश में दावा पेश करने के लिए इंटरनेशनल आवेदन की तिथि से 30-31 महीने के बीच में ही पीसीटी आवेदन करना चाहिए।

क्यों Vakilsearch


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