IPR में एंटी कॉम्पिटिटिव अभ्यास क्या हैं?

Last Updated at: May 30, 2020
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IPR में एंटी कॉम्पिटिटिव अभ्यास क्या हैं?

बौद्धिक संपदा अधिकार (Intellectual property rights) उस व्यक्ति को दिए गए विशेष अधिकार (Special right) हैं जो आविष्कार करते हैं या अपनी रचनात्मकता (Creativity) का उपयोग करते हुए कुछ तकनीकी नवाचार (technological innovation) करते हैं जो प्रकृति में अमूर्त (Abstract) हैं। ये अधिकार विशेष रूप से किसी विशेष अवधि (particular period) के लिए दिए गए लाभ का आनंद लेने के लिए दिए जाते हैं यह दूसरों को अपनी संपत्ति का उपयोग करने के लिए प्रतिबंधित (Restricted) करता है। IPR या बौद्धिक संपदा अधिकार निर्माता को दिए गए कानूनी अधिकार हैं जो उसे मुकदमा करने और नुकसान (harm) का दावा (Claim) करने की अनुमति (Permission) देते हैं यदि कोई भी इसका उपयोग अपने ज्ञान के बिना (Without your knowledge) करता है। इसलिए मूल रूप से  IPR  बाजार में एकाधिकार (Monopoly) को बढ़ावा देता है।

बाजार में कई प्रतियोगी (competitor) हैं। प्रतिस्पर्धा अधिनियम (Competition act) बाजार में प्रतिस्पर्धा को बढ़ावा देने वाले नियमों और विनियमों का  ( rules and regulations) एक समूह है। कानून का उद्देश्य अत्यधिक उपभोक्ता कल्याण है और उत्पादकता (Productivity) में वृद्धि होती है जिससे प्रमुख ताकतों ( forces)  द्वारा बनाई गई बाजार शक्तियों को दबा दिया (Powers suppressed) जाता है। IPR बाजार में एकाधिकार बनाता है जबकि प्रतिस्पर्धा कानून एकाधिकार  (Competition law monopoly) के खिलाफ लड़ाई करता है। आईपी ​​कानून सीए के तहत एकाधिकार बाजार के आम नियम के अपवाद (General rule exception)  हैं।

विरोधी प्रतिस्पर्धी समझौते –

Anti-competitive agreement –

सीए का सेक 3 प्रतिस्पर्धी-विरोधी (Anti competitive) समझौ तों से संबंधित (Related to agreements) है। प्रतिस्पर्धात्मक समझौते (Competitive agreement) वे समझौते हैं जो प्रतिस्पर्धा को रोकते हैं एक कंपनी का दूसरे पर प्रभुत्व (Domination) ज़माने से । ये समझौते दो प्रकार के होते हैं  क्षैतिज और लंबवत (horizontal and vertical) समझौते। क्षैतिज विरोधी प्रतिस्पर्धात्मक समझौते  (Horizontal anti-competitive agreement)  [Sec 3 (3)] दो या दो से अधिक प्रत्यक्ष प्रतियोगियों (Direct competitors) के बीच किए जाते हैं जो बाजार में प्रतिस्पर्धी अर्थव्यवस्था (Competitive economy) को प्रभावित कर सकते हैं जिससे उपभोक्ता के अधिकारों और हितों को सीमित (Interests limited) किया जा सकता है। निर्माता और बिचौलिए (Manufacturer and middlemen) के बीच लंबित समझौते (Pending agreement) [Sec 3 (4)] किए जाते हैं  यह उपभोक्ता के कल्याण (Consumer welfare) को प्रभावित (influenced) करने वाले बाजार में आपूर्ति (The supply ) के प्रवाह में बाधा (  Impede the flow of) डालता है। यह धारा किसी भी व्यक्ति या कंपनी या उद्यम (enterprise) या किसी कानूनी इकाई को किसी भी समझौते में प्रवेश करने से रोकती है जो भारत में प्रतिस्पर्धा पैदा करने का कारण होता है ।

इस खंड के अपवाद (Exception clause) धारा  3 (5) में दिए गए हैं  जो कहता है कि सीए कॉपीराइट अधिनियम , पेटेंट अधिनियम , ट्रेड मार्क्स अधिनियम , भौगोलिक संकेतक माल अधिनियम , और के तहत उल्लिखित (referential) है जो अपने अधिकारों की रक्षा के लिए उचित शर्त (Fair condition) लगाकर व्यक्ति के अधिकारों को प्रतिबंधित (Restricted) करेगा। डिजाइन अधिनियम (Design act) । साथ ही  यह समझौते के अनुसार  भारत से निर्यात (Export from india) करने में व्यक्ति के अधिकार में हस्तक्षेप नहीं करता है । हालाँकि (However) यह निहित (Contained) है कि धारा 3 IPR को लागू करने के लिए लगाए गए अनुचित प्रतिबंधों (Unfair restrictions) को नियंत्रित (Controlled) करता है। यहां इस अधिनियम (Act) के तहत उचित शर्तों को (Under appropriate conditions) समझाया और परिभाषित (Explained and defined) नहीं किया गया है।

क़ानूनी सलाह लें

विरोधी प्रतिस्पर्धात्मक प्रथाओं (Anti competitive practices) के कारण उचित परिस्थितियाँ (Appropriate conditions) नीचे दी गई हैं

  1. पेटेंट पूल (Patent pool) – पेटेंट पूलिंग का मतलब है एक लाइसेंस के तहत अपने आविष्कारों को लॉक करने के लिए दो या अधिक पेटेंट मालिकों के बीच एक समझौते में प्रवेश करना | यह स्वस्थ प्रतिस्पर्धा (Healthy competition) को बढ़ावा देना है जिससे बाजार का शोषण (Exploitation of the market) रोका जा सके। वे बाजार में नई प्रविष्टियों (New entries) को रोकते हैं और लंबे समय के लिए सुपर लाभ कमाते हैं। और अपूर्ण प्रतिस्पर्धा (Imperfect competition) के निर्माण में भी मदद करता है जो सरकार की नीतियों के खिलाफ (Against policies) है। इस प्रकार का पेटेंट पूलिंग इलेक्ट्रॉनिक क्षेत्र (Patent Pooling Electronic Zone) और फार्मास्युटिकल उद्योगों (Pharmaceutical industries) में किया जाता है।
  2. टाई-अप व्यवस्था- (Tie-up arrangement) यह प्रतिबंधात्मक व्यापार प्रथाओं (Restrictive trade practices) में से एक है  व्यवस्था में बंधने का मतलब (Means to tie in the system) है कि एक शर्त (Bet) यह होनी चाहिए कि एक अच्छा खरीदने वाला एक शर्त के रूप में कुछ अन्य सामान खरीदने के लिए सहमत (Agree) है । टाई-इन-व्यवस्था (Tie-in arrangement) के लिए निम्नलिखित आवश्यक हैं। दो उत्पाद होने चाहिए ताकि विक्रेता एक साथ मिल सकें। विक्रेता के पास पर्याप्त बाजार शक्ति होनी चाहिए | और एक विशेष आपूर्ति और वितरण समझौता (Supply and distribution agreement) होना चाहिए। पेटेंट के मालिक (Patent owner) से आवश्यक सामान प्राप्त करने के लिए एक लाइसेंसधारी (License holder) होना चाहिए। फिर से यह प्रथा (Custom) बाजार में प्रतिस्पर्धा (Market competition) को प्रतिबंधित (Restricted) करती है क्योंकि लेन-देन (transaction) लोगों के कुछ समूहों के बीच किया जाएगा।
  3. पेटेंट की अवधि समाप्त होने के बाद भीरॉयल्टी का भुगतान  (Royalty payment) करने के लिए निरंतरता होनी (To have continuity) चाहिए
  4. यदि बाजार कुछ शर्त (Bet) लगाता है जो अनुसंधान (The research) और विकास में प्रतिस्पर्धा को प्रतिबंधित (Restrict competition) करता है या लाइसेंसधारक को प्रौद्योगिकी (Technology to licensee) का उपयोग करने से रोकता हैतो स्वचालित रूप (Automatic form) से अनुभाग के तहत (Under section) दिए गए अपवादों (Exceptions) को जब्त कर (Confiscated) लिया जाएगा
  5. शर्त के अधीन करने के बजाययदि लाइसेंसधारी (License holder) को प्रश्न में IPR  की वैधता के बारे में चुनौती दी (Challenged) जाती है, तो इस तरह के सवाल उठाना विरोधी प्रतिस्पर्धात्मक आचरण (Competitive behavior) हैं
  6. ऐसा कहा जाता है कि लाइसेंसधारी को केवल लाइसेंसधारक को वापस देने की आवश्यकता होती है और किसी और को नहीं। यदि वह ऐसा करता है, तो यह लाइसेंसकर्ता की बाजार शक्ति (Market power) को बढ़ाता है जिससे सेक 3 (5) के तहत विशेषाधिकार खो (Lost privilege) देता है
  7. यदि लाइसेंसकर्ता कीमत को ठीक करता है और उक्त मूल्य पर बेचने के लिए लाइसेंसधारी को धक्का देता है, तो यह एक प्रतिस्पर्धी-विरोधी अभ्यास (Anti-competitive drills) है
  8. लाइसेंसधारी को व्यापार-कुछ निश्चित क्षेत्र (Business certain areas) में ले जाने के लिए प्रतिबंधित (Restricted) किया जा सकता हैइस प्रथा को प्रतिस्पर्धा-विरोधी प्रथाओं (Anti-competitive practices) के रूप में माना जाता है।
  9. लाइसेंसधारी (License holder) ने लाइसेंसधारी को अधिक लाइसेंस के लिए आवेदन करने के लिए बाध्य किया होगाभले ही लाइसेंसधारी को इसकी आवश्यकता न हो। इस तरह की जबरदस्ती एक प्रतिबंधित व्यापार प्रथा (Restricted trade practice) है।
  10. लाइसेंसी और लाइसेंसकर्ता के बीच लगाया गया गुणवत्ता नियंत्रण समझौता आवश्यक (Control agreement required) गारंटी से परे है। फिर ऐसे पेटेंट की प्रभावशीलता प्रतिस्पर्धी-विरोधी प्रथाओं (Anti-competitive practices) है
  11. यदि लाइसेंसधारी को लाइसेंस प्राप्त उत्पादों को बेचने के अपने अधिकारों तक सीमित है और बेचने के संबंध में लाइसेंसकर्ता के आदेश का पालन करने के लिए कहा जाता हैतो इसे प्रतिबंधात्मक व्यापार प्रथाओं (Restrictive trade practices) के रूप में माना जाता है
  12. लाइसेंसधारी द्वारा ट्रेडमार्क के उपयोग के लिए लाइसेंसकर्ता द्वारा लगाए गए प्रतिबंध को अनुचित व्यवहार माना जाता है
  13. यदि समझौता लाइसेंसधारक (License holder) को व्यापार करने के लिए अनुचित प्रतिबंध लगाता (Imposes undue sanctions) है, तो यह व्यापार प्रथाओं को प्रतिबंधित (Restrict business practices) करता है
  14. इसके अलावाअगर लाइसेंसकर्ता पेटेंट किए गए आविष्कार (Licensor patented invention) के अधिकतम उपयोग को सीमित करता हैतो यह लाइसेंसधारी प्रतियोगिता और प्रतिरक्षा (Competition and defense) को प्रभावित कर सकता है।

यदि समझौते में उपर्युक्त मानदंडों (Above mentioned criteria) में से कोई भी शामिल (Include) है  तो इसे प्रतिस्पर्धी-विरोधी प्रथाओं (Anti-competitive practices) के रूप में माना जाता है और उन्हें सीए के सेक (Ca ke sec) 3 (5) से छूट दी जाती है और विशेषाधिकार (Privilege) वापस ले लिए जा सकते है । अधिनियम की धारा (Section of the act) 27 में कहा गया है कि इन प्रथाओं ( practices or custom) की भारत के प्रतिस्पर्धा आयोग द्वारा (By the Competition Commission) पूछताछ (Inquiry) की जाएगी। और धारक या लाइसेंसकर्ता को पिछले तीन वित्तीय वर्ष (financial year) के लिए औसत कारोबार (Average turnover) के 10% से कम नहीं दंडित किया जाएगा। यदि लाइसेंसकर्ता कंपनी या उद्यम (Company or enterprise) है  तो उसके निदेशक को दोषी (Guilty to director) माना जाता है और उसे दंडित (Punished) किया जाएगा

 

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बौद्धिक संपदा अधिकार (Intellectual property rights) उस व्यक्ति को दिए गए विशेष अधिकार (Special right) हैं जो आविष्कार करते हैं या अपनी रचनात्मकता (Creativity) का उपयोग करते हुए कुछ तकनीकी नवाचार (technological innovation) करते हैं जो प्रकृति में अमूर्त (Abstract) हैं। ये अधिकार विशेष रूप से किसी विशेष अवधि (particular period) के लिए दिए गए लाभ का आनंद लेने के लिए दिए जाते हैं यह दूसरों को अपनी संपत्ति का उपयोग करने के लिए प्रतिबंधित (Restricted) करता है। IPR या बौद्धिक संपदा अधिकार निर्माता को दिए गए कानूनी अधिकार हैं जो उसे मुकदमा करने और नुकसान (harm) का दावा (Claim) करने की अनुमति (Permission) देते हैं यदि कोई भी इसका उपयोग अपने ज्ञान के बिना (Without your knowledge) करता है। इसलिए मूल रूप से  IPR  बाजार में एकाधिकार (Monopoly) को बढ़ावा देता है।

बाजार में कई प्रतियोगी (competitor) हैं। प्रतिस्पर्धा अधिनियम (Competition act) बाजार में प्रतिस्पर्धा को बढ़ावा देने वाले नियमों और विनियमों का  ( rules and regulations) एक समूह है। कानून का उद्देश्य अत्यधिक उपभोक्ता कल्याण है और उत्पादकता (Productivity) में वृद्धि होती है जिससे प्रमुख ताकतों ( forces)  द्वारा बनाई गई बाजार शक्तियों को दबा दिया (Powers suppressed) जाता है। IPR बाजार में एकाधिकार बनाता है जबकि प्रतिस्पर्धा कानून एकाधिकार  (Competition law monopoly) के खिलाफ लड़ाई करता है। आईपी ​​कानून सीए के तहत एकाधिकार बाजार के आम नियम के अपवाद (General rule exception)  हैं।

विरोधी प्रतिस्पर्धी समझौते –

Anti-competitive agreement –

सीए का सेक 3 प्रतिस्पर्धी-विरोधी (Anti competitive) समझौ तों से संबंधित (Related to agreements) है। प्रतिस्पर्धात्मक समझौते (Competitive agreement) वे समझौते हैं जो प्रतिस्पर्धा को रोकते हैं एक कंपनी का दूसरे पर प्रभुत्व (Domination) ज़माने से । ये समझौते दो प्रकार के होते हैं  क्षैतिज और लंबवत (horizontal and vertical) समझौते। क्षैतिज विरोधी प्रतिस्पर्धात्मक समझौते  (Horizontal anti-competitive agreement)  [Sec 3 (3)] दो या दो से अधिक प्रत्यक्ष प्रतियोगियों (Direct competitors) के बीच किए जाते हैं जो बाजार में प्रतिस्पर्धी अर्थव्यवस्था (Competitive economy) को प्रभावित कर सकते हैं जिससे उपभोक्ता के अधिकारों और हितों को सीमित (Interests limited) किया जा सकता है। निर्माता और बिचौलिए (Manufacturer and middlemen) के बीच लंबित समझौते (Pending agreement) [Sec 3 (4)] किए जाते हैं  यह उपभोक्ता के कल्याण (Consumer welfare) को प्रभावित (influenced) करने वाले बाजार में आपूर्ति (The supply ) के प्रवाह में बाधा (  Impede the flow of) डालता है। यह धारा किसी भी व्यक्ति या कंपनी या उद्यम (enterprise) या किसी कानूनी इकाई को किसी भी समझौते में प्रवेश करने से रोकती है जो भारत में प्रतिस्पर्धा पैदा करने का कारण होता है ।

इस खंड के अपवाद (Exception clause) धारा  3 (5) में दिए गए हैं  जो कहता है कि सीए कॉपीराइट अधिनियम , पेटेंट अधिनियम , ट्रेड मार्क्स अधिनियम , भौगोलिक संकेतक माल अधिनियम , और के तहत उल्लिखित (referential) है जो अपने अधिकारों की रक्षा के लिए उचित शर्त (Fair condition) लगाकर व्यक्ति के अधिकारों को प्रतिबंधित (Restricted) करेगा। डिजाइन अधिनियम (Design act) । साथ ही  यह समझौते के अनुसार  भारत से निर्यात (Export from india) करने में व्यक्ति के अधिकार में हस्तक्षेप नहीं करता है । हालाँकि (However) यह निहित (Contained) है कि धारा 3 IPR को लागू करने के लिए लगाए गए अनुचित प्रतिबंधों (Unfair restrictions) को नियंत्रित (Controlled) करता है। यहां इस अधिनियम (Act) के तहत उचित शर्तों को (Under appropriate conditions) समझाया और परिभाषित (Explained and defined) नहीं किया गया है।

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विरोधी प्रतिस्पर्धात्मक प्रथाओं (Anti competitive practices) के कारण उचित परिस्थितियाँ (Appropriate conditions) नीचे दी गई हैं

  1. पेटेंट पूल (Patent pool) – पेटेंट पूलिंग का मतलब है एक लाइसेंस के तहत अपने आविष्कारों को लॉक करने के लिए दो या अधिक पेटेंट मालिकों के बीच एक समझौते में प्रवेश करना | यह स्वस्थ प्रतिस्पर्धा (Healthy competition) को बढ़ावा देना है जिससे बाजार का शोषण (Exploitation of the market) रोका जा सके। वे बाजार में नई प्रविष्टियों (New entries) को रोकते हैं और लंबे समय के लिए सुपर लाभ कमाते हैं। और अपूर्ण प्रतिस्पर्धा (Imperfect competition) के निर्माण में भी मदद करता है जो सरकार की नीतियों के खिलाफ (Against policies) है। इस प्रकार का पेटेंट पूलिंग इलेक्ट्रॉनिक क्षेत्र (Patent Pooling Electronic Zone) और फार्मास्युटिकल उद्योगों (Pharmaceutical industries) में किया जाता है।
  2. टाई-अप व्यवस्था- (Tie-up arrangement) यह प्रतिबंधात्मक व्यापार प्रथाओं (Restrictive trade practices) में से एक है  व्यवस्था में बंधने का मतलब (Means to tie in the system) है कि एक शर्त (Bet) यह होनी चाहिए कि एक अच्छा खरीदने वाला एक शर्त के रूप में कुछ अन्य सामान खरीदने के लिए सहमत (Agree) है । टाई-इन-व्यवस्था (Tie-in arrangement) के लिए निम्नलिखित आवश्यक हैं। दो उत्पाद होने चाहिए ताकि विक्रेता एक साथ मिल सकें। विक्रेता के पास पर्याप्त बाजार शक्ति होनी चाहिए | और एक विशेष आपूर्ति और वितरण समझौता (Supply and distribution agreement) होना चाहिए। पेटेंट के मालिक (Patent owner) से आवश्यक सामान प्राप्त करने के लिए एक लाइसेंसधारी (License holder) होना चाहिए। फिर से यह प्रथा (Custom) बाजार में प्रतिस्पर्धा (Market competition) को प्रतिबंधित (Restricted) करती है क्योंकि लेन-देन (transaction) लोगों के कुछ समूहों के बीच किया जाएगा।
  3. पेटेंट की अवधि समाप्त होने के बाद भीरॉयल्टी का भुगतान  (Royalty payment) करने के लिए निरंतरता होनी (To have continuity) चाहिए
  4. यदि बाजार कुछ शर्त (Bet) लगाता है जो अनुसंधान (The research) और विकास में प्रतिस्पर्धा को प्रतिबंधित (Restrict competition) करता है या लाइसेंसधारक को प्रौद्योगिकी (Technology to licensee) का उपयोग करने से रोकता हैतो स्वचालित रूप (Automatic form) से अनुभाग के तहत (Under section) दिए गए अपवादों (Exceptions) को जब्त कर (Confiscated) लिया जाएगा
  5. शर्त के अधीन करने के बजाययदि लाइसेंसधारी (License holder) को प्रश्न में IPR  की वैधता के बारे में चुनौती दी (Challenged) जाती है, तो इस तरह के सवाल उठाना विरोधी प्रतिस्पर्धात्मक आचरण (Competitive behavior) हैं
  6. ऐसा कहा जाता है कि लाइसेंसधारी को केवल लाइसेंसधारक को वापस देने की आवश्यकता होती है और किसी और को नहीं। यदि वह ऐसा करता है, तो यह लाइसेंसकर्ता की बाजार शक्ति (Market power) को बढ़ाता है जिससे सेक 3 (5) के तहत विशेषाधिकार खो (Lost privilege) देता है
  7. यदि लाइसेंसकर्ता कीमत को ठीक करता है और उक्त मूल्य पर बेचने के लिए लाइसेंसधारी को धक्का देता है, तो यह एक प्रतिस्पर्धी-विरोधी अभ्यास (Anti-competitive drills) है
  8. लाइसेंसधारी को व्यापार-कुछ निश्चित क्षेत्र (Business certain areas) में ले जाने के लिए प्रतिबंधित (Restricted) किया जा सकता हैइस प्रथा को प्रतिस्पर्धा-विरोधी प्रथाओं (Anti-competitive practices) के रूप में माना जाता है।
  9. लाइसेंसधारी (License holder) ने लाइसेंसधारी को अधिक लाइसेंस के लिए आवेदन करने के लिए बाध्य किया होगाभले ही लाइसेंसधारी को इसकी आवश्यकता न हो। इस तरह की जबरदस्ती एक प्रतिबंधित व्यापार प्रथा (Restricted trade practice) है।
  10. लाइसेंसी और लाइसेंसकर्ता के बीच लगाया गया गुणवत्ता नियंत्रण समझौता आवश्यक (Control agreement required) गारंटी से परे है। फिर ऐसे पेटेंट की प्रभावशीलता प्रतिस्पर्धी-विरोधी प्रथाओं (Anti-competitive practices) है
  11. यदि लाइसेंसधारी को लाइसेंस प्राप्त उत्पादों को बेचने के अपने अधिकारों तक सीमित है और बेचने के संबंध में लाइसेंसकर्ता के आदेश का पालन करने के लिए कहा जाता हैतो इसे प्रतिबंधात्मक व्यापार प्रथाओं (Restrictive trade practices) के रूप में माना जाता है
  12. लाइसेंसधारी द्वारा ट्रेडमार्क के उपयोग के लिए लाइसेंसकर्ता द्वारा लगाए गए प्रतिबंध को अनुचित व्यवहार माना जाता है
  13. यदि समझौता लाइसेंसधारक (License holder) को व्यापार करने के लिए अनुचित प्रतिबंध लगाता (Imposes undue sanctions) है, तो यह व्यापार प्रथाओं को प्रतिबंधित (Restrict business practices) करता है
  14. इसके अलावाअगर लाइसेंसकर्ता पेटेंट किए गए आविष्कार (Licensor patented invention) के अधिकतम उपयोग को सीमित करता हैतो यह लाइसेंसधारी प्रतियोगिता और प्रतिरक्षा (Competition and defense) को प्रभावित कर सकता है।

यदि समझौते में उपर्युक्त मानदंडों (Above mentioned criteria) में से कोई भी शामिल (Include) है  तो इसे प्रतिस्पर्धी-विरोधी प्रथाओं (Anti-competitive practices) के रूप में माना जाता है और उन्हें सीए के सेक (Ca ke sec) 3 (5) से छूट दी जाती है और विशेषाधिकार (Privilege) वापस ले लिए जा सकते है । अधिनियम की धारा (Section of the act) 27 में कहा गया है कि इन प्रथाओं ( practices or custom) की भारत के प्रतिस्पर्धा आयोग द्वारा (By the Competition Commission) पूछताछ (Inquiry) की जाएगी। और धारक या लाइसेंसकर्ता को पिछले तीन वित्तीय वर्ष (financial year) के लिए औसत कारोबार (Average turnover) के 10% से कम नहीं दंडित किया जाएगा। यदि लाइसेंसकर्ता कंपनी या उद्यम (Company or enterprise) है  तो उसके निदेशक को दोषी (Guilty to director) माना जाता है और उसे दंडित (Punished) किया जाएगा

 

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