जनहित याचिका दायर करने की प्रक्रिया

Last Updated at: March 28, 2020
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क्या आप सरकार की नीतियों और फैसलों से निराश हैं ? क्या आप समझते हैं कि सरकार द्वारा लिए गए निर्णय मानवाधिकार उल्लंघन, भ्रष्टाचार, सामाजिक अन्याय इतियादी का कारण हैं ? क्या आप कानून के द्वारा इन्हें बदलना व ठीक करना चाहते हैं? अगर हाँ, तो जनहित याचिका आपके लिए ही है। बीते वर्षों में कई जनहित याचिका दायर की गई हैं। ये जीतने व हारने के अतिरिक्त लोगों के जीवन पर प्रभाव डाल रही हैं। 

क्या होती है जनहित याचिका ?

जनहित याचिका वंचित अल्पसंख्यकों व व्यक्तियों को लाभ प्रदान करने या सार्वजनिक मुद्दों को उठाने के लिए की गई एक कानून करवाई है। यह कानून का इस्तेमाल करके सामाजिक बदलाव लाने की एक प्रणाली है। जनहित याचिका वह याचिका होती है जो किसी व्यक्ति, नागरिक समुदाय या किसी ग़ैर सरकारी संगठन द्वारा न्यायालय में किसी ऐसी समस्या के लिए दायर की जाती है जिससे व्यापक जनहित जुड़ा हो। जनहित याचिका का प्रमुख उद्देश्य सामान्य लोगों को कानूनी अधिकार प्रदान करना होता है जिससे वह ज़्यादा बेहतर तरीके से कानूनी समाधान प्राप्त कर सकें। इसे किसी भी कानून में परिभाषित नहीं किया गया है। ऐसे मुद्दे को उठाना जिससे किसी एक व्यक्ति नहीं बल्कि बड़ी संख्या में लोगों पर प्रभाव पड़े न्यायिक सक्रियता का ही नतीजा है।

निचे आप देख सकते हैं हमारे महत्वपूर्ण सर्विसेज जैसे कि फ़ूड लाइसेंस के लिए कैसे अप्लाई करें, ट्रेडमार्क रेजिस्ट्रशन के लिए कितना वक़्त लगता है और उद्योग आधार रेजिस्ट्रेशन का क्या प्रोसेस है .

 

कौन दायर कर सकता है जनहित याचिका ?

कोई भी भारतीय नागरिक जनहित याचिका दायर कर सकता है। जनहित याचिका दायर करने की अकेली शर्त ये है कि ये इसे किसी व्यक्तिगत हित के लिए नहीं बल्कि महत्वपूर्ण सामाजिक लाभ के लिए ही दायर किया जा सकता है। अगर अदालत को लगता है कि दायर याचिका का कोई सामाजिक महत्व है तो वह इसकी पूरी ज़िम्मेदारी लेती है तथा केस को चलाने के लिए एक अधिवक्ता भी नियुक्त करती है।

कोई जनहित याचिका दायर करने का निर्णय कैसे ले ?

कई मुआमलों में ये सलाह दी जाती है की व्यक्ति या समूह जनहित याचिका दायर करने से पहले दूसरे पक्ष को मुद्दे पर अपनी प्रतिक्रिया देने का मौका प्रदान करे और उसके बाद निर्णय ले।

कानूनी सलाह लें

उदाहरण स्वरूप, अगर आपको सरकार की किसी नीति या अन्य किसी बात पर आपत्ति है तो पहले इसे संबंधित प्राधिकरण से मिलकर सुलझाने की कोशिश करनी चाहिए। उन्हें पूरे मुआमले से वाकिफ कराएं और कारवाई करने के लिए कुछ समय दें। अगर वो तब भी कोई कारवाई नहीं करते हैं या कोई प्रतिक्रिया नहीं देते हैं तो आप जनहित याचिका दायर कर सकते हैं।

जनहित याचिका उच्च न्यायालय व उच्चतम न्यायालय में दायर की जा सकती हैं।

जनहित याचिका दायर करने की प्रक्रिया

जनहित याचिका दायर करने से पहले आपको मुआमले पर पूरा शोध करना होगा। अगर याचिका कई लोगों के हित को प्रभावित कर रही है तो याचिकाकर्ता के लिए ये ज़रूरी है कि वो प्रभावित होने वाले सभी समूहों व व्यक्तियों से परामर्श ले।

जब आप याचिका दायर करने के लिये तैयार हो जाएं तो अपना केस मज़बूत करने के लिए सबूत के तौर पर सभी महत्वपूर्ण जानकारी व दस्तावेज़ जमा करें। आप ख़ुद भी केस लड़ सकते हैं व अपना पक्ष रखने के लिए कोई वकील भी नियुक्त कर सकते हैं। 

याचिका दायर करने से पहले अधिवक्ता की सलाह लेना हमेशा उचित होता है। अगर आप ख़ुद केस पर अपना पक्ष रखने चाहते हैं तो आपको तय समय में न्यायालय को अपनी समस्या बताने व समझाने के लिए ख़ुद को तैयार कर लेना चाहिए।

जब जनहित याचिका की कॉपी उच्च न्यायालय में दायर होने के लिए तैयार हो जाये तो याचिका की दो कॉपी न्यायालय में प्रस्तुत कीजिए। इसके साथ ही आपको याचिका की एक कॉपी एडवांस में उत्तरदाताओं के समक्ष भी प्रस्तुत करनी होगी। वह याचिका की कॉपी उत्तरदाताओं को प्रस्तुत कर दिये जाने का सबूत भी याचिका की कॉपी के साथ प्रत्यय करना होगा। 

अगर याचिका सुप्रीम कोर्ट में दायर की गयी है तो याचिका की पाँच कॉपी न्यायालय में प्रस्तुत करनी होंगी। जब न्यायालय नोटिस जारी करेगा तो उत्तरदायी को याचिका की एक कॉपी भेजी जाएगी

तो क्या आप सोच रहे हैं कि जनहित याचिका दायर कर के कई लोगों का जीवन प्रकाशमय किया जाए ? तो राय लीजिए एक श्रेष्ठ कानूनी सलाहकार से और शुरू कीजिए न्याय के लिए अपनी लड़ाई।  http://vakilsearch.com/public-interest-litigation

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क्या आप सरकार की नीतियों और फैसलों से निराश हैं ? क्या आप समझते हैं कि सरकार द्वारा लिए गए निर्णय मानवाधिकार उल्लंघन, भ्रष्टाचार, सामाजिक अन्याय इतियादी का कारण हैं ? क्या आप कानून के द्वारा इन्हें बदलना व ठीक करना चाहते हैं? अगर हाँ, तो जनहित याचिका आपके लिए ही है। बीते वर्षों में कई जनहित याचिका दायर की गई हैं। ये जीतने व हारने के अतिरिक्त लोगों के जीवन पर प्रभाव डाल रही हैं। 

क्या होती है जनहित याचिका ?

जनहित याचिका वंचित अल्पसंख्यकों व व्यक्तियों को लाभ प्रदान करने या सार्वजनिक मुद्दों को उठाने के लिए की गई एक कानून करवाई है। यह कानून का इस्तेमाल करके सामाजिक बदलाव लाने की एक प्रणाली है। जनहित याचिका वह याचिका होती है जो किसी व्यक्ति, नागरिक समुदाय या किसी ग़ैर सरकारी संगठन द्वारा न्यायालय में किसी ऐसी समस्या के लिए दायर की जाती है जिससे व्यापक जनहित जुड़ा हो। जनहित याचिका का प्रमुख उद्देश्य सामान्य लोगों को कानूनी अधिकार प्रदान करना होता है जिससे वह ज़्यादा बेहतर तरीके से कानूनी समाधान प्राप्त कर सकें। इसे किसी भी कानून में परिभाषित नहीं किया गया है। ऐसे मुद्दे को उठाना जिससे किसी एक व्यक्ति नहीं बल्कि बड़ी संख्या में लोगों पर प्रभाव पड़े न्यायिक सक्रियता का ही नतीजा है।

निचे आप देख सकते हैं हमारे महत्वपूर्ण सर्विसेज जैसे कि फ़ूड लाइसेंस के लिए कैसे अप्लाई करें, ट्रेडमार्क रेजिस्ट्रशन के लिए कितना वक़्त लगता है और उद्योग आधार रेजिस्ट्रेशन का क्या प्रोसेस है .

 

कौन दायर कर सकता है जनहित याचिका ?

कोई भी भारतीय नागरिक जनहित याचिका दायर कर सकता है। जनहित याचिका दायर करने की अकेली शर्त ये है कि ये इसे किसी व्यक्तिगत हित के लिए नहीं बल्कि महत्वपूर्ण सामाजिक लाभ के लिए ही दायर किया जा सकता है। अगर अदालत को लगता है कि दायर याचिका का कोई सामाजिक महत्व है तो वह इसकी पूरी ज़िम्मेदारी लेती है तथा केस को चलाने के लिए एक अधिवक्ता भी नियुक्त करती है।

कोई जनहित याचिका दायर करने का निर्णय कैसे ले ?

कई मुआमलों में ये सलाह दी जाती है की व्यक्ति या समूह जनहित याचिका दायर करने से पहले दूसरे पक्ष को मुद्दे पर अपनी प्रतिक्रिया देने का मौका प्रदान करे और उसके बाद निर्णय ले।

कानूनी सलाह लें

उदाहरण स्वरूप, अगर आपको सरकार की किसी नीति या अन्य किसी बात पर आपत्ति है तो पहले इसे संबंधित प्राधिकरण से मिलकर सुलझाने की कोशिश करनी चाहिए। उन्हें पूरे मुआमले से वाकिफ कराएं और कारवाई करने के लिए कुछ समय दें। अगर वो तब भी कोई कारवाई नहीं करते हैं या कोई प्रतिक्रिया नहीं देते हैं तो आप जनहित याचिका दायर कर सकते हैं।

जनहित याचिका उच्च न्यायालय व उच्चतम न्यायालय में दायर की जा सकती हैं।

जनहित याचिका दायर करने की प्रक्रिया

जनहित याचिका दायर करने से पहले आपको मुआमले पर पूरा शोध करना होगा। अगर याचिका कई लोगों के हित को प्रभावित कर रही है तो याचिकाकर्ता के लिए ये ज़रूरी है कि वो प्रभावित होने वाले सभी समूहों व व्यक्तियों से परामर्श ले।

जब आप याचिका दायर करने के लिये तैयार हो जाएं तो अपना केस मज़बूत करने के लिए सबूत के तौर पर सभी महत्वपूर्ण जानकारी व दस्तावेज़ जमा करें। आप ख़ुद भी केस लड़ सकते हैं व अपना पक्ष रखने के लिए कोई वकील भी नियुक्त कर सकते हैं। 

याचिका दायर करने से पहले अधिवक्ता की सलाह लेना हमेशा उचित होता है। अगर आप ख़ुद केस पर अपना पक्ष रखने चाहते हैं तो आपको तय समय में न्यायालय को अपनी समस्या बताने व समझाने के लिए ख़ुद को तैयार कर लेना चाहिए।

जब जनहित याचिका की कॉपी उच्च न्यायालय में दायर होने के लिए तैयार हो जाये तो याचिका की दो कॉपी न्यायालय में प्रस्तुत कीजिए। इसके साथ ही आपको याचिका की एक कॉपी एडवांस में उत्तरदाताओं के समक्ष भी प्रस्तुत करनी होगी। वह याचिका की कॉपी उत्तरदाताओं को प्रस्तुत कर दिये जाने का सबूत भी याचिका की कॉपी के साथ प्रत्यय करना होगा। 

अगर याचिका सुप्रीम कोर्ट में दायर की गयी है तो याचिका की पाँच कॉपी न्यायालय में प्रस्तुत करनी होंगी। जब न्यायालय नोटिस जारी करेगा तो उत्तरदायी को याचिका की एक कॉपी भेजी जाएगी

तो क्या आप सोच रहे हैं कि जनहित याचिका दायर कर के कई लोगों का जीवन प्रकाशमय किया जाए ? तो राय लीजिए एक श्रेष्ठ कानूनी सलाहकार से और शुरू कीजिए न्याय के लिए अपनी लड़ाई।  http://vakilsearch.com/public-interest-litigation

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