टैक्स कलेक्टेड सोर्स कंप्लायंस और इ कॉमर्स बिज़नेस

Last Updated at: August 04, 2020
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टैक्स कलेक्टेड सोर्स कंप्लायंस और इ कॉमर्स बिज़नेस

ई-कॉमर्स बिजनेस का जीएसटी रूल में एक अपना स्पेशल जगह है। सोर्स पर कलेक्टेड टैक्स को 1 अक्टूबर 2018 से लागू किया गया है| आइये देखते हैं इनका इ कॉमर्स ऑपरेटर्स के बिज़नेस पर क्या असर है|

नए अपडेट की सम्मरी 

  • टीसीएस प्रोविजन्स के परपज से ई-कॉमर्स ऑपरेटरों (ई सी ओ) द्वारा एक अलग रजिस्ट्रेशन किया जाना चाहिए।
  • ई-कॉमर्स ऑपरेटरों (ईसीओ) को अपने प्लेटफॉर्म के माध्यम से की गई सप्लाई  के वेलयु पर टीसीएस के 2% की डिडक्शन करनी चाहिए और  बाद के 10 महीने  के  या उससे पहले गवर्नमेंट को टीसीएस की अमाउंट भेजनी चाहिए।
  • ई-कॉमर्स ऑपरेटर को अगले 10 महीने के  या उससे पहले कलेक्टेड  टीसीएस के डिटेल के साथ मंथली रिटर्न भी प्रेसेंट  करना चाहिए। (GSTR 8) 

यह आर्टिकल ई-कॉमर्स ऑपरेटर पर लागू टीसीएस प्रोविजन्स पर डिटेल प्रदान करता है – दोनों मॉडलों के तहत रिगूलर इनवाइस और रजिस्ट्रेशन के अधिक डिटेल के लिए 

ई-कॉमर्स टीसीएस पर अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न –

1. क्या TCS प्रोविजन्स सभी के लिए अप्लीकेबल हैं ?

नहीं  वे केवल ई-कॉमर्स ऑपरेटरों के लिए लागू होते हैं। सभी ई-कॉमर्स ऑपरेटरों के लिए भी नहीं | केवल ई-कॉमर्स एग्रीगेटर्स के लिए।

2. यदि ई-कॉमर्स ऑपरेटर एग्रीगेटर और इन्वेंट्री मॉडल दोनों में काम कर रहा है – तो क्या होगा ..?

उस स्टेट में TCS प्रोविजन्स केवल एग्रीगेटर मॉडल में एक्ज्क्युटेड बिक्री के लिए लागू होंगे।  इन्वेंटरी मॉडल की बिक्री के लिए – टीसीएस में डिडक्शन की कोई आवश्यकता नहीं है।

3. क्या TCS के लिए रजिस्ट्रेशन कराने के लिए ई-कॉमर्स ऑपरेटर की आवश्यकता होती है ..?

हां, ई-कॉमर्स ऑपरेटर को टीसीएस उद्देश्य के लिए जीएसटी के तहत एक अलग रजिस्ट्रेशन प्राप्त करना चाहिए। उसे TCS के उद्देश्य के लिए एक अलग रिटर्न (GSTR 8) भी दाखिल करना चाहिए।  

क़ानूनी सलाह लें

4. टीसीएस का कितना प्रतिशत काटा जाना है और इसकी केल्कुलेशन  कैसे की जानी है?

अभी के लिए  TCS को एक ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म के माध्यम से सेलर द्वारा की गई कुल सप्लाई पर 2% की रेट से डिडक्शन किया जाना है।  (प्रतिशत सरकार द्वारा जल्द ही कन्फर्मेशन की जाएगी।)

  • स्टेट की सेल  के मामले में 1% सीजीएसटी और 1% एसजीएसटी
  • इंटरस्टेट सेल के मामले में IGST का 2%

इसकी केल्कुलेशन एक मंथ में सेल  रिटर्न के टोटल वेलयु  पर की जाएगी।

5. सेल रिटर्न के मामले में क्या किया जाना चाहिए?

एक महीने में नेट सेल्स पर टीसीएस डिडक्सन किया जाना चाहिए| एक महीने में की गई कुल सेल में से – सेल रिटर्न में डिडक्सन की जानी चाहिए और नेट एमाउंट पर  टीसीएस की केल्कुलेशन और डिडक्सन की जानी चाहिए।

6. ईसीओ को प्रत्येक स्टेट के लिए स्टेट – स्पेसल रजिस्ट्रेशन प्राप्त करना चाहिए जिसमें वह आपरेट होता है?

जीएसटी के प्रिलिमिनरी प्रोविजन्स के अनुसार  हाँ ईसीओ को कई स्टेट  में आपरेटिंग के मामले में स्टेट – स्पेसल रजिस्ट्रेशन प्राप्त करना चाहिए। (हालांकि  अगले कुछ दिनों में सरकार से इस पहलू में स्पष्टता आने की होप है। पहले ही टॉप ईसीओ अपने स्टेट – स्पेसल रजिस्ट्रेशन ले चुके हैं |  लेकिन इस प्रोविजन्स  के कारण स्माल ईसीओ काफी अफेकटेड होने की होप है)।

TCS पर गवर्नमेंट से अक्सर पूछे जाने वाले क्वेश्चन जल्द ही सामने आते हैं |  जिसमें हम  TCS की रेट और स्टेट – स्पेसल रजिस्ट्रेशन आवश्यकता पर भी  क्लियरिटी  प्राप्त कर सकते हैं 

7. ECO प्लेटफार्मों के माध्यम से बेचने वाले विक्रेताओं पर क्या प्रभाव पड़ता है?

फ्लिपकार्ट और अमेज़न  जैसे प्लेटफ़ॉर्म के ज़रिए सेल होने वाले वेंडर्स के लिए कोई एक्सट्रा काम्प्लीएंस  नहीं होगा  हालांकि 

ECO द्वारा डिडक्सन  किए गए TCS को GST पेमेंट करते समय क्रेडिट के रूप में लिया जा सकता है।

 

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टैक्स कलेक्टेड सोर्स कंप्लायंस और इ कॉमर्स बिज़नेस

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ई-कॉमर्स बिजनेस का जीएसटी रूल में एक अपना स्पेशल जगह है। सोर्स पर कलेक्टेड टैक्स को 1 अक्टूबर 2018 से लागू किया गया है| आइये देखते हैं इनका इ कॉमर्स ऑपरेटर्स के बिज़नेस पर क्या असर है|

नए अपडेट की सम्मरी 

  • टीसीएस प्रोविजन्स के परपज से ई-कॉमर्स ऑपरेटरों (ई सी ओ) द्वारा एक अलग रजिस्ट्रेशन किया जाना चाहिए।
  • ई-कॉमर्स ऑपरेटरों (ईसीओ) को अपने प्लेटफॉर्म के माध्यम से की गई सप्लाई  के वेलयु पर टीसीएस के 2% की डिडक्शन करनी चाहिए और  बाद के 10 महीने  के  या उससे पहले गवर्नमेंट को टीसीएस की अमाउंट भेजनी चाहिए।
  • ई-कॉमर्स ऑपरेटर को अगले 10 महीने के  या उससे पहले कलेक्टेड  टीसीएस के डिटेल के साथ मंथली रिटर्न भी प्रेसेंट  करना चाहिए। (GSTR 8) 

यह आर्टिकल ई-कॉमर्स ऑपरेटर पर लागू टीसीएस प्रोविजन्स पर डिटेल प्रदान करता है – दोनों मॉडलों के तहत रिगूलर इनवाइस और रजिस्ट्रेशन के अधिक डिटेल के लिए 

ई-कॉमर्स टीसीएस पर अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न –

1. क्या TCS प्रोविजन्स सभी के लिए अप्लीकेबल हैं ?

नहीं  वे केवल ई-कॉमर्स ऑपरेटरों के लिए लागू होते हैं। सभी ई-कॉमर्स ऑपरेटरों के लिए भी नहीं | केवल ई-कॉमर्स एग्रीगेटर्स के लिए।

2. यदि ई-कॉमर्स ऑपरेटर एग्रीगेटर और इन्वेंट्री मॉडल दोनों में काम कर रहा है – तो क्या होगा ..?

उस स्टेट में TCS प्रोविजन्स केवल एग्रीगेटर मॉडल में एक्ज्क्युटेड बिक्री के लिए लागू होंगे।  इन्वेंटरी मॉडल की बिक्री के लिए – टीसीएस में डिडक्शन की कोई आवश्यकता नहीं है।

3. क्या TCS के लिए रजिस्ट्रेशन कराने के लिए ई-कॉमर्स ऑपरेटर की आवश्यकता होती है ..?

हां, ई-कॉमर्स ऑपरेटर को टीसीएस उद्देश्य के लिए जीएसटी के तहत एक अलग रजिस्ट्रेशन प्राप्त करना चाहिए। उसे TCS के उद्देश्य के लिए एक अलग रिटर्न (GSTR 8) भी दाखिल करना चाहिए।  

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4. टीसीएस का कितना प्रतिशत काटा जाना है और इसकी केल्कुलेशन  कैसे की जानी है?

अभी के लिए  TCS को एक ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म के माध्यम से सेलर द्वारा की गई कुल सप्लाई पर 2% की रेट से डिडक्शन किया जाना है।  (प्रतिशत सरकार द्वारा जल्द ही कन्फर्मेशन की जाएगी।)

  • स्टेट की सेल  के मामले में 1% सीजीएसटी और 1% एसजीएसटी
  • इंटरस्टेट सेल के मामले में IGST का 2%

इसकी केल्कुलेशन एक मंथ में सेल  रिटर्न के टोटल वेलयु  पर की जाएगी।

5. सेल रिटर्न के मामले में क्या किया जाना चाहिए?

एक महीने में नेट सेल्स पर टीसीएस डिडक्सन किया जाना चाहिए| एक महीने में की गई कुल सेल में से – सेल रिटर्न में डिडक्सन की जानी चाहिए और नेट एमाउंट पर  टीसीएस की केल्कुलेशन और डिडक्सन की जानी चाहिए।

6. ईसीओ को प्रत्येक स्टेट के लिए स्टेट – स्पेसल रजिस्ट्रेशन प्राप्त करना चाहिए जिसमें वह आपरेट होता है?

जीएसटी के प्रिलिमिनरी प्रोविजन्स के अनुसार  हाँ ईसीओ को कई स्टेट  में आपरेटिंग के मामले में स्टेट – स्पेसल रजिस्ट्रेशन प्राप्त करना चाहिए। (हालांकि  अगले कुछ दिनों में सरकार से इस पहलू में स्पष्टता आने की होप है। पहले ही टॉप ईसीओ अपने स्टेट – स्पेसल रजिस्ट्रेशन ले चुके हैं |  लेकिन इस प्रोविजन्स  के कारण स्माल ईसीओ काफी अफेकटेड होने की होप है)।

TCS पर गवर्नमेंट से अक्सर पूछे जाने वाले क्वेश्चन जल्द ही सामने आते हैं |  जिसमें हम  TCS की रेट और स्टेट – स्पेसल रजिस्ट्रेशन आवश्यकता पर भी  क्लियरिटी  प्राप्त कर सकते हैं 

7. ECO प्लेटफार्मों के माध्यम से बेचने वाले विक्रेताओं पर क्या प्रभाव पड़ता है?

फ्लिपकार्ट और अमेज़न  जैसे प्लेटफ़ॉर्म के ज़रिए सेल होने वाले वेंडर्स के लिए कोई एक्सट्रा काम्प्लीएंस  नहीं होगा  हालांकि 

ECO द्वारा डिडक्सन  किए गए TCS को GST पेमेंट करते समय क्रेडिट के रूप में लिया जा सकता है।

 

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