डिजिटल बिज़नेस – लीगल कॉम्पलियन्स

Last Updated at: August 18, 2020
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डिजिटल बिज़नेस – लीगल कॉम्पलियन्स

क्या आपन अपने बिज़नेस को डिजिटल कर रहे हैं? तो ज़रूर इन बातों का ध्यान रखें। आपका जानना जरूरी है कि आपको कौन सी लाइसेंस लेनी है और कौन से डाक्यूमेंट्स बनवाने हैं

जीएसटी रजिस्ट्रेशन 

सालाना 40 लाख (पूर्वोत्तर राज्यों के लिए 10 लाख रुपये) जी हाँ अगर आपका वार्षिक टर्नओवर इतना है तो जीएसटी रजिस्ट्रशन करवा लें | वकिलसर्च कि मदद से आप सरल रूप से ये रजिस्ट्रेशन करवा सकते हैं।

बैंक एकाउंट्स 

एक बार एलएलपी या कंपनी को इंकलुड़ करते है इसके बाद बैंक से संपर्क करके बिजनेस के नाम पर एक बैंक एकाउंट  आसानी से ओपेन किया जा सकता है। तो बैंक करंट अकाउंट खोलने में देर लगाएं|

क़ानूनी सलाह लें

कानूनी दस्तावेज

ऑनलाइन बिक्री करते समय  टर्म्स एंड कंडीशन्स डाक्यूमेंट एंड प्राइवेसि पालिसी  का उपयोग करके बिजनेस और बिजनेस के प्रमोटर्स की प्रोटेक्ट करना आवश्यक है  एक प्रोपराइटरशिप डिजिटल मार्केटिंग वेबसाइट के मामले में  टर्म्स एंड कंडीशन्स प्राइवेसि पालिसी और डिस्क्लेमर को अपनी गतिविधियों और अच्छे और ऑनलाइन बेचे जाने वाले प्रोडक्ट की नेचर के बेस पर बिजनेस के रूप में फरमेटेड किया जाना चाहिए। 

यदि बिजनेस ऑनलाइन मार्केटप्लेस के माध्यम से गुड्स और प्रोडक्ट को बेचता है  तो वेंडर् का एग्रीमेंट या कानूनी डाक्यूमेंट बाज़ार द्वारा प्रदान किया जाता है और वेंडर् को वेंडर् के एग्रीमेंट द्वारा स्टैंड होना चाहिए। सभी वेंडर् को एग्रीमेंट पर सिग्नेचर  करने से पहले वेंडर्स के एग्रीमेंट्स को रीड करना आवश्यक है।

साइबर लॉं क्राइम के लिए बचाव

इंडिया में सभी डिजिटल मार्केटिंग बिजनेस को साइबर लॉं को श्योर करना चाहिए। यह तब बढ़ गया है जब इंडिया बिजनेस के लिए साइबर कानून के कारण वर्क बहुत हार्ड हो गया है और फारेन कंपनियों और वेबसाइटों को रिगूलर रूप से साइबर लेबर के नन प्रेक्टिस  के लिए इंडिया में कोर्ट केस चलाया जाता है। इसके अलावा  इंडिया में डिजिटल मार्केटिंग बिजनेस को रखरखाव  प्राइवेसि सेक्यूरिटी डेटा सेक्यूरिटी, साइबर सेक्यूरिटी , प्राइवेसि आदि को भी श्योर करना चाहिए  इस तरह के डिफरेंस को पेमेंट गेटवे के संबंध में भी ध्यान देने की जरूरत है, जो बिजनेस के लिए चुनते हैं।

 अदर लीगल कंप्लीएन्स

इंडिया में डिजिटल बिजनेस करने के लिए लीगल कम्प्लीएंस में अदर लीगल जैसे एग्रीमेंट लॉं, इंडिएन फेनल कोड आदि का कम्प्लीएंस भी शामिल है। इसमें इंडिया में रिलेवेंट बैंकिंग और फाइनेंसिएल क्राइटेरिया का कम्प्लीएंस भी इंकलुड़ है।  

 

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डिजिटल बिज़नेस – लीगल कॉम्पलियन्स

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क्या आपन अपने बिज़नेस को डिजिटल कर रहे हैं? तो ज़रूर इन बातों का ध्यान रखें। आपका जानना जरूरी है कि आपको कौन सी लाइसेंस लेनी है और कौन से डाक्यूमेंट्स बनवाने हैं

जीएसटी रजिस्ट्रेशन 

सालाना 40 लाख (पूर्वोत्तर राज्यों के लिए 10 लाख रुपये) जी हाँ अगर आपका वार्षिक टर्नओवर इतना है तो जीएसटी रजिस्ट्रशन करवा लें | वकिलसर्च कि मदद से आप सरल रूप से ये रजिस्ट्रेशन करवा सकते हैं।

बैंक एकाउंट्स 

एक बार एलएलपी या कंपनी को इंकलुड़ करते है इसके बाद बैंक से संपर्क करके बिजनेस के नाम पर एक बैंक एकाउंट  आसानी से ओपेन किया जा सकता है। तो बैंक करंट अकाउंट खोलने में देर लगाएं|

क़ानूनी सलाह लें

कानूनी दस्तावेज

ऑनलाइन बिक्री करते समय  टर्म्स एंड कंडीशन्स डाक्यूमेंट एंड प्राइवेसि पालिसी  का उपयोग करके बिजनेस और बिजनेस के प्रमोटर्स की प्रोटेक्ट करना आवश्यक है  एक प्रोपराइटरशिप डिजिटल मार्केटिंग वेबसाइट के मामले में  टर्म्स एंड कंडीशन्स प्राइवेसि पालिसी और डिस्क्लेमर को अपनी गतिविधियों और अच्छे और ऑनलाइन बेचे जाने वाले प्रोडक्ट की नेचर के बेस पर बिजनेस के रूप में फरमेटेड किया जाना चाहिए। 

यदि बिजनेस ऑनलाइन मार्केटप्लेस के माध्यम से गुड्स और प्रोडक्ट को बेचता है  तो वेंडर् का एग्रीमेंट या कानूनी डाक्यूमेंट बाज़ार द्वारा प्रदान किया जाता है और वेंडर् को वेंडर् के एग्रीमेंट द्वारा स्टैंड होना चाहिए। सभी वेंडर् को एग्रीमेंट पर सिग्नेचर  करने से पहले वेंडर्स के एग्रीमेंट्स को रीड करना आवश्यक है।

साइबर लॉं क्राइम के लिए बचाव

इंडिया में सभी डिजिटल मार्केटिंग बिजनेस को साइबर लॉं को श्योर करना चाहिए। यह तब बढ़ गया है जब इंडिया बिजनेस के लिए साइबर कानून के कारण वर्क बहुत हार्ड हो गया है और फारेन कंपनियों और वेबसाइटों को रिगूलर रूप से साइबर लेबर के नन प्रेक्टिस  के लिए इंडिया में कोर्ट केस चलाया जाता है। इसके अलावा  इंडिया में डिजिटल मार्केटिंग बिजनेस को रखरखाव  प्राइवेसि सेक्यूरिटी डेटा सेक्यूरिटी, साइबर सेक्यूरिटी , प्राइवेसि आदि को भी श्योर करना चाहिए  इस तरह के डिफरेंस को पेमेंट गेटवे के संबंध में भी ध्यान देने की जरूरत है, जो बिजनेस के लिए चुनते हैं।

 अदर लीगल कंप्लीएन्स

इंडिया में डिजिटल बिजनेस करने के लिए लीगल कम्प्लीएंस में अदर लीगल जैसे एग्रीमेंट लॉं, इंडिएन फेनल कोड आदि का कम्प्लीएंस भी शामिल है। इसमें इंडिया में रिलेवेंट बैंकिंग और फाइनेंसिएल क्राइटेरिया का कम्प्लीएंस भी इंकलुड़ है।  

 

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