चेक बाउंस होने पर क्या हो सकता है?

Last Updated at: August 17, 2020
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चेक बाउंस होने पर क्या हो सकता है?

हम सभी के दिमाग में अक्सर ये सवाल आता है कि चेक बाउंस होने पर क्या हो सकता है? क्या हमे दुबारा चेक देना पड़ेगा? क्या कोई सजा है? क्या हमें बैंक वाले फ़ोन करेंगे? आइये इस दुविधा से आज निजात पाते हैं। जानते हैं कि आखिर चेक बाउंस होने पर क्या हो सकता है।           

सिविल और क्रिमिनल चार्ज 

यदि आप भाग्यशाली हैं तो आप बाउंस चेक के लिए बैंक को केवल एक छोटा सा जुर्माना दे सकते हैं। हालांकि अगर पीड़ित पार्टी चाहे तो वे चेक  इश्यू करने वाले के रूप में आपके खिलाफ एक सिविल या क्रिमिनल केस दर्ज कर सकते हैं।

यदि पेयर फीस लगाना चाहता है तो निगोसीएबल  एक्ट 1881 चेक बाउंस के मामले में लागू किया जा सकता है।
एक्ट की आर्टिकल 138 में कहा गया है कि चेक में कोई भी बाउन्स एक्ट के अंडर पनिसेबल है और इसके तहत दो साल तक का कारावास  या मोनेटरी रिफ़ंड या दोनों हो सकते हैं।

चेक बाउंस के लिए बैंक पेनाल्टी

यदि आपका चेक कम राशि या किसी अन्य टेक्निकल रीज़न के कारण बाउंस होता है  जैसे कि सिग्नेचर मिसमैच, डिफॉल्टर और पेयी  दोनों अपने रिलेटेड बैंकों द्वारा चार्ज किए जाते हैं।

यदि बाउंस चेक किसी भी लोन के रिपेयमेंट के अगेन्स्ट है  तो आपको बैंक द्वारा लिए गए पेनाल्टी के फीस के साथ-साथ डिलेय पेमेंट फीस  (जो कि रु 200 से 700 तक होता है) को भी बियर करना होगा।

चेक आउटवर्ड रिटर्न के लिए पेनाल्टी फीस  मोस्टली बैंकों के लिए 300 रुपये लगभग है | जबकि चेक  इनवर्ड रिटर्न के लिए फीस ज्यादातर 100 रुपये है।

चेक बाउंस रेमेडी

CIBIL स्कोर पर प्रभाव

आपके बिजनेस के लिए CIBIL स्कोर महत्वपूर्ण है क्योंकि यह आपके इंवेस्टर्स या बैंकों के साथ आपके एक्वेशन को एफेक्ट कर सकता है जब आप अपने लोन के लिए उनसे संपर्क करते हैं। सिंगल बाउन्स चेक यहां तक ​​कि बहुत ही रियल रिजन्स के साथ जो सिग्नेचर सही नहीं हैं या डेट में इक्वलिटी नहीं है  क्रेडिटर्स के साथ आपके सम्बन्ध को अफेक्ट कर सकते हैं।

आपके CIBIL स्कोर को अच्छा रखने का सबसे अच्छा तरीका यह है कि आपके  चेक को कभी भी  इन्फेमस न किया जाए  और आपके पास चेक एनकैशमेंट के बाद आपके एकाउंट में मिनिमम बैलेंस की कंपेयर में अधिक एमाउंट हो 

हालाँकि एक्जांपल हैं जब चेक इस कारण बाउंस हो सकता है :
A  स्पेलिंग में गलतियाँ
B  – तारीख में  गलतियाँ 

C  – ओवरराइटिंग
D  – डाक्यूमेंट के साथ मैच नहीं करने वाले सिग्नेचर। एकाउंट में लो एमाउंट (यह फंड को कम होने पर  चेक इश्यू करने के लिए ग्रोस इरिस्पन्सिबिलिटी होगी ) फिगर और वर्ड्स में लिखी गई राशि में अन सिमिलेरिटी , इत्यादि

किसी भी पेमेंट जो रेटेड टाइम ड्यूरेशन (जो आमतौर पर 15 दिन का होता है) के भीतर नहीं किया जाता है  इसे क्राइम माना जाएगा और पेमेंट  करने वाला आपको चेक की  ड्रैग के अगेन्स्ट  क्रिमिनल प्रोसीजर स्टार्ट करने के लिए कोर्ट में ले जा सकता है 

कम्पलेन एंटर होने के लिए कोर्ट 30 दिनों की नोटिस पिरिएड देती है यदि प्रेस्क्राइब्ड टाइम के भीतर नए पेमेंट प्राप्त नहीं हुए हैं।

चेक के बाउंस  होने के कई कारण हैं  और वे जो भी हो सकते हैं यह जरूरी है कि चेक इश्यू करते समय ध्यान रखने की जरूरत है 

रिग्रेट करने से बेहतर है सिक्योर रहना। इसलिए श्योर करें | कि इश्यू किए गए चेक रिटेन असेसिबिलिटी और क्लेरिटी के साथ हैं। और जिन सिचुएशन में चेक बाउंस नोटिस जारी किया जाता है  अंडर टाइम फ्रेम पेमेंट के साथ रिटर्न करे।

 

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चेक बाउंस होने पर क्या हो सकता है?

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हम सभी के दिमाग में अक्सर ये सवाल आता है कि चेक बाउंस होने पर क्या हो सकता है? क्या हमे दुबारा चेक देना पड़ेगा? क्या कोई सजा है? क्या हमें बैंक वाले फ़ोन करेंगे? आइये इस दुविधा से आज निजात पाते हैं। जानते हैं कि आखिर चेक बाउंस होने पर क्या हो सकता है।           

सिविल और क्रिमिनल चार्ज 

यदि आप भाग्यशाली हैं तो आप बाउंस चेक के लिए बैंक को केवल एक छोटा सा जुर्माना दे सकते हैं। हालांकि अगर पीड़ित पार्टी चाहे तो वे चेक  इश्यू करने वाले के रूप में आपके खिलाफ एक सिविल या क्रिमिनल केस दर्ज कर सकते हैं।

यदि पेयर फीस लगाना चाहता है तो निगोसीएबल  एक्ट 1881 चेक बाउंस के मामले में लागू किया जा सकता है।
एक्ट की आर्टिकल 138 में कहा गया है कि चेक में कोई भी बाउन्स एक्ट के अंडर पनिसेबल है और इसके तहत दो साल तक का कारावास  या मोनेटरी रिफ़ंड या दोनों हो सकते हैं।

चेक बाउंस के लिए बैंक पेनाल्टी

यदि आपका चेक कम राशि या किसी अन्य टेक्निकल रीज़न के कारण बाउंस होता है  जैसे कि सिग्नेचर मिसमैच, डिफॉल्टर और पेयी  दोनों अपने रिलेटेड बैंकों द्वारा चार्ज किए जाते हैं।

यदि बाउंस चेक किसी भी लोन के रिपेयमेंट के अगेन्स्ट है  तो आपको बैंक द्वारा लिए गए पेनाल्टी के फीस के साथ-साथ डिलेय पेमेंट फीस  (जो कि रु 200 से 700 तक होता है) को भी बियर करना होगा।

चेक आउटवर्ड रिटर्न के लिए पेनाल्टी फीस  मोस्टली बैंकों के लिए 300 रुपये लगभग है | जबकि चेक  इनवर्ड रिटर्न के लिए फीस ज्यादातर 100 रुपये है।

चेक बाउंस रेमेडी

CIBIL स्कोर पर प्रभाव

आपके बिजनेस के लिए CIBIL स्कोर महत्वपूर्ण है क्योंकि यह आपके इंवेस्टर्स या बैंकों के साथ आपके एक्वेशन को एफेक्ट कर सकता है जब आप अपने लोन के लिए उनसे संपर्क करते हैं। सिंगल बाउन्स चेक यहां तक ​​कि बहुत ही रियल रिजन्स के साथ जो सिग्नेचर सही नहीं हैं या डेट में इक्वलिटी नहीं है  क्रेडिटर्स के साथ आपके सम्बन्ध को अफेक्ट कर सकते हैं।

आपके CIBIL स्कोर को अच्छा रखने का सबसे अच्छा तरीका यह है कि आपके  चेक को कभी भी  इन्फेमस न किया जाए  और आपके पास चेक एनकैशमेंट के बाद आपके एकाउंट में मिनिमम बैलेंस की कंपेयर में अधिक एमाउंट हो 

हालाँकि एक्जांपल हैं जब चेक इस कारण बाउंस हो सकता है :
A  स्पेलिंग में गलतियाँ
B  – तारीख में  गलतियाँ 

C  – ओवरराइटिंग
D  – डाक्यूमेंट के साथ मैच नहीं करने वाले सिग्नेचर। एकाउंट में लो एमाउंट (यह फंड को कम होने पर  चेक इश्यू करने के लिए ग्रोस इरिस्पन्सिबिलिटी होगी ) फिगर और वर्ड्स में लिखी गई राशि में अन सिमिलेरिटी , इत्यादि

किसी भी पेमेंट जो रेटेड टाइम ड्यूरेशन (जो आमतौर पर 15 दिन का होता है) के भीतर नहीं किया जाता है  इसे क्राइम माना जाएगा और पेमेंट  करने वाला आपको चेक की  ड्रैग के अगेन्स्ट  क्रिमिनल प्रोसीजर स्टार्ट करने के लिए कोर्ट में ले जा सकता है 

कम्पलेन एंटर होने के लिए कोर्ट 30 दिनों की नोटिस पिरिएड देती है यदि प्रेस्क्राइब्ड टाइम के भीतर नए पेमेंट प्राप्त नहीं हुए हैं।

चेक के बाउंस  होने के कई कारण हैं  और वे जो भी हो सकते हैं यह जरूरी है कि चेक इश्यू करते समय ध्यान रखने की जरूरत है 

रिग्रेट करने से बेहतर है सिक्योर रहना। इसलिए श्योर करें | कि इश्यू किए गए चेक रिटेन असेसिबिलिटी और क्लेरिटी के साथ हैं। और जिन सिचुएशन में चेक बाउंस नोटिस जारी किया जाता है  अंडर टाइम फ्रेम पेमेंट के साथ रिटर्न करे।

 

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