प्राइवेट लिमिटेड कंपनी के लिए वार्षिक कम्प्लाइंसेस

Last Updated at: May 12, 2020
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कंपनी

2013 का कंपनी अधिनियम  (companies Act) उन सभी नियमों और विनियमों (Rules and regulations) को निर्धारित (Determined) करता है जो भारत में प्रत्येक निजी फर्म (Private firm) को पालन करना पड़ता है| वैसे तो कंप्लायंस के नियम बड़े विस्तृत है, पर आइये नज़र डालते हैं कुछ महत्वपूर्ण बातों पर|

भारत में काम कर रही  जो कंपनियों और स्टार्टअप्स है उनको वार्षिक अनुपालन (obedience) की तैयारी करनी होती है। भारत में बहुत सारे स्टार्टअप और व्यवसाय हैं जिनमें सबसे लोकप्रिय कानूनी इकाई यानी (means ) प्राइवेट लिमिटेड कंपनी है लेकिन कम से कम उन अनुपालनों (obedience) के बारे में जानते हैं जिन्हें प्राइवेट लिमिटेड कंपनी के लिए पूरा करना होता है।

कंपनी अधिनियम (companies Act)

वर्ष 1956 में कंपनी अधिनियम की शुरुआत हुई | इसके साथ ही  प्राइवेट लिमिटेड कंपनियों की परिभाषा और दायरे ( scope) में बहुत सारे बदलाव हुए हैं। आजकल  स्टार्टअप तेजी से एक प्रवृत्ति (Trend) बन रहे हैं  लेकिन यथार्थवादी  मुद्दों (Realistic Issues) के साथ-साथ कानूनी मुद्दों पर विचार करते है साथ ही यह भी जानते है कि  एक निजी व्यवसाय निगम (Private business corporation) को व्यवस्थित (systematic) और चलाना आसान नहीं है। कानून कंपनी अधिनियम 2013 के तहत उल्लिखित कई शर्तों और अनुपालनों को लागू करके निजी कंपनियों को सीमित करने की कोशिश करता है।

खैर (Well) , कभी-कभी किसी के स्वयं के द्वारा सभी अनुपालनों को समझना मुश्किल है  इसलिए निजी लिमिटेड कंपनियों के लिए विशेषज्ञों की सहमति (Expert Consent) प्राप्त करना बेहतर होता है ताकि कानून के अनुसार सभी आवश्यक अनुपालन (Compliance) का पालन किया जा सके | ताकि (So that) अनावश्यक दंड (punishment) से बचा जा सके। आपकी आसान समझ (Easy understanding) के लिए  आइए नीचे कुछ मूलभूत अनुपालन (obedience) देखें।

 कृपया मूल (original) बातें ठीक से समझें |

कंपनी के गठन के दस्तावेज “मेमोरैंडम ऑफ एसोसिएशन” में एक वस्तु खंड (Commodity block) है  जो कंपनी के व्यवसाय का वर्णन कानून के प्रस्ताव (Proposal) के अनुसार करता है  जो कहता है किकेवल कंपनी के निदेशक मंडल (Board of directors) की सहमति से  यह किसी भी अन्य को करना चाहिए ऑब्जेक्ट क्लॉज में बताई गई बातों से परे व्यावसायिक गतिविधि। ” 1 अप्रैल 2014 से प्रभावी होने के साथ प्रमुख व्यवसाय के अलावा अन्य व्यवसायों को करने वाली ऐसी सभी कंपनियों को वस्तु खंड (Commodity block) में अधिसूचित (Notified) किया जाना चाहिए। यदि अनुपालन नहीं किया जाता है  तो ऐसे व्यवसायों को अल्ट्रा-वायरस (Ultra-virus) माना जाएगा | जो बदले में  कंपनी को अपना नाम बदलने की आवश्यकता होती है   कई व्यावसायिक गतिविधियों के कारण  जिसके परिणामस्वरूप (resultant) मुकदमा भी हो सकता है।

कंपनी की पहचान प्रदर्शित करना 

नए अधिनियम के धारा 12 (3) के तहत हर कंपनी को अपना नाम , अपने पंजीकृत कार्यालय का पता और कॉर्पोरेट पहचान संख्या के साथ टेलीफोन नंबर , फैक्स नंबर , ईमेल कंपनी के व्यवसाय पत्र , बिल हेड, पत्र पत्रों पर मुद्रित (Printed) करना होता है | और इसके सभी नोटिस और अन्य आधिकारिक प्रकाशनों (Official publications) में। CIN (कॉरपोरेट आइडेंटिटी नंबर) को उद्धृत (Cited) करना होता है  किसी भी विफलता (Failure) के मामले में डिफ़ॉल्ट कंपनी को हर दिन हजार रुपये का जुर्माना लगाया जाता है  और डिफ़ॉल्ट के ठीक होने तक हर अधिकारी को डिफ़ॉल्ट रूप से लगाया जाता है।

आपकी कंपनी

असुरक्षित ऋण की स्वीकृति  (Unsecured loan approval)

कई कंपनियां निदेशक के रिश्तेदारों से या कंपनी के सदस्यों से ऋण स्वीकार करती हैं क्योंकि कंपनी अधिनियम 1956 के प्रावधानों (Provisions) में इसकी अनुमति है। हालांकि  जमा नियम 2014 की स्वीकृति के अनुसार  कंपनी निदेशक (director) के रिश्तेदारों से असुरक्षित ऋण (unsecured loan) और जमा (deposit) प्राप्त कर सकती है अगर यह केवल उधार ली गई राशि नहीं है लेकिन उपहार के रूप में। इसके अलावा  ऐसे असुरक्षित ऋण वापस किए जाने चाहिए । हालांकि  जो कंपनियां पहले से स्वीकार किए गए ऋण को वापस करने में विफल रहती हैं  वे कंपनी अधिनियम 2013 की धारा 73 से 76 के प्रावधानों के तहत दंडनीय है और अभियोजन की कार्यवाही के रूप में सामना (Face) कर सकते हैं। 

कानूनी तौर पर पूरा कंप्लीट (Complete)

निदेशक मंडल के साथ बैठक

पहली बैठक कंपनी के निगमन (Incorporation) के तीस दिनों के भीतर होनी चाहिए। बोर्ड की बैठक की सूचना कंपनी के प्रत्येक निदेशक (director) को आमने-सामने या ईमेल के माध्यम से मिलने से सात दिन पहले दी जानी चाहिए।

लेखा परीक्षक की नियुक्ति (Appointment of auditor)

कंपनी शुरू करने की तारीख से एक महीने के भीतर एक ऑडिटर नियुक्त किया जाना चाहिए। प्रत्येक एकाउंटेंट को लेखा (Accounts) तैयार करना चाहिए और अंत में ऑडिटर की सहमति प्राप्त करनी चाहिए और ऑडिट रिपोर्ट प्रदान करनी चाहिए | जो कि एक होनी चाहिए। ऐसा करने में विफलता (Failure) के कारण महान दंड (Great punishment) होगा।

निदेशकों की रिपोर्ट (Directors report)

सबसे महत्वपूर्ण निर्देशकों की रिपोर्ट (Directors report) कंपनी अधिनियम की धारा 134 के तहत उल्लिखित होनी चाहिए | जो वर्ष के दौरान परिचालन (Operating) , शुद्ध लाभ , लाभांश घोषणा (Dividend declaration) आदि शामिल (Include) है। कंपनी को व्यवसाय शुरू करने के 60 दिनों के भीतर शेयर प्रमाणपत्र (stock certificate) भी जारी करना (stock certificate) होता है।

फाइलिंग एनुअल रिटर्न

यह भी अनिवार्य है कि प्रत्येक कंपनी को http://www.mca.gov.in/ पर उपलब्ध ई-फॉर्म में सालाना (Yearly) आम बैठक के 60 दिनों के भीतर कंपनियों के रजिस्टर के साथ अपना वार्षिक रिटर्न दाखिल (Annual return filing) करना होता है निदेशकों में से कम से कम एक द्वारा  जिसे डिजिटल हस्ताक्षरित (Signed) करना होता है। 

निष्कर्ष ( conclusion)

इसलिए इसे संक्षेप में कहें , जैसा कि कहा जाता है  , रोकथाम इलाज से बेहतर है (prevention is better than cure) कंपनियों को उन मूल अनुपालनों के बारे में पता होना चाहिए| जो पूरे होने हैं और सभी अनुपालनों (Compliance) को पूरा करने के लिए आवश्यक कदम उठाने चाहिए | ताकि (so that ) अनावश्यक त्रुटियां से बचा जा सकें ।

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प्राइवेट लिमिटेड कंपनी के लिए वार्षिक कम्प्लाइंसेस

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2013 का कंपनी अधिनियम  (companies Act) उन सभी नियमों और विनियमों (Rules and regulations) को निर्धारित (Determined) करता है जो भारत में प्रत्येक निजी फर्म (Private firm) को पालन करना पड़ता है| वैसे तो कंप्लायंस के नियम बड़े विस्तृत है, पर आइये नज़र डालते हैं कुछ महत्वपूर्ण बातों पर|

भारत में काम कर रही  जो कंपनियों और स्टार्टअप्स है उनको वार्षिक अनुपालन (obedience) की तैयारी करनी होती है। भारत में बहुत सारे स्टार्टअप और व्यवसाय हैं जिनमें सबसे लोकप्रिय कानूनी इकाई यानी (means ) प्राइवेट लिमिटेड कंपनी है लेकिन कम से कम उन अनुपालनों (obedience) के बारे में जानते हैं जिन्हें प्राइवेट लिमिटेड कंपनी के लिए पूरा करना होता है।

कंपनी अधिनियम (companies Act)

वर्ष 1956 में कंपनी अधिनियम की शुरुआत हुई | इसके साथ ही  प्राइवेट लिमिटेड कंपनियों की परिभाषा और दायरे ( scope) में बहुत सारे बदलाव हुए हैं। आजकल  स्टार्टअप तेजी से एक प्रवृत्ति (Trend) बन रहे हैं  लेकिन यथार्थवादी  मुद्दों (Realistic Issues) के साथ-साथ कानूनी मुद्दों पर विचार करते है साथ ही यह भी जानते है कि  एक निजी व्यवसाय निगम (Private business corporation) को व्यवस्थित (systematic) और चलाना आसान नहीं है। कानून कंपनी अधिनियम 2013 के तहत उल्लिखित कई शर्तों और अनुपालनों को लागू करके निजी कंपनियों को सीमित करने की कोशिश करता है।

खैर (Well) , कभी-कभी किसी के स्वयं के द्वारा सभी अनुपालनों को समझना मुश्किल है  इसलिए निजी लिमिटेड कंपनियों के लिए विशेषज्ञों की सहमति (Expert Consent) प्राप्त करना बेहतर होता है ताकि कानून के अनुसार सभी आवश्यक अनुपालन (Compliance) का पालन किया जा सके | ताकि (So that) अनावश्यक दंड (punishment) से बचा जा सके। आपकी आसान समझ (Easy understanding) के लिए  आइए नीचे कुछ मूलभूत अनुपालन (obedience) देखें।

 कृपया मूल (original) बातें ठीक से समझें |

कंपनी के गठन के दस्तावेज “मेमोरैंडम ऑफ एसोसिएशन” में एक वस्तु खंड (Commodity block) है  जो कंपनी के व्यवसाय का वर्णन कानून के प्रस्ताव (Proposal) के अनुसार करता है  जो कहता है किकेवल कंपनी के निदेशक मंडल (Board of directors) की सहमति से  यह किसी भी अन्य को करना चाहिए ऑब्जेक्ट क्लॉज में बताई गई बातों से परे व्यावसायिक गतिविधि। ” 1 अप्रैल 2014 से प्रभावी होने के साथ प्रमुख व्यवसाय के अलावा अन्य व्यवसायों को करने वाली ऐसी सभी कंपनियों को वस्तु खंड (Commodity block) में अधिसूचित (Notified) किया जाना चाहिए। यदि अनुपालन नहीं किया जाता है  तो ऐसे व्यवसायों को अल्ट्रा-वायरस (Ultra-virus) माना जाएगा | जो बदले में  कंपनी को अपना नाम बदलने की आवश्यकता होती है   कई व्यावसायिक गतिविधियों के कारण  जिसके परिणामस्वरूप (resultant) मुकदमा भी हो सकता है।

कंपनी की पहचान प्रदर्शित करना 

नए अधिनियम के धारा 12 (3) के तहत हर कंपनी को अपना नाम , अपने पंजीकृत कार्यालय का पता और कॉर्पोरेट पहचान संख्या के साथ टेलीफोन नंबर , फैक्स नंबर , ईमेल कंपनी के व्यवसाय पत्र , बिल हेड, पत्र पत्रों पर मुद्रित (Printed) करना होता है | और इसके सभी नोटिस और अन्य आधिकारिक प्रकाशनों (Official publications) में। CIN (कॉरपोरेट आइडेंटिटी नंबर) को उद्धृत (Cited) करना होता है  किसी भी विफलता (Failure) के मामले में डिफ़ॉल्ट कंपनी को हर दिन हजार रुपये का जुर्माना लगाया जाता है  और डिफ़ॉल्ट के ठीक होने तक हर अधिकारी को डिफ़ॉल्ट रूप से लगाया जाता है।

आपकी कंपनी

असुरक्षित ऋण की स्वीकृति  (Unsecured loan approval)

कई कंपनियां निदेशक के रिश्तेदारों से या कंपनी के सदस्यों से ऋण स्वीकार करती हैं क्योंकि कंपनी अधिनियम 1956 के प्रावधानों (Provisions) में इसकी अनुमति है। हालांकि  जमा नियम 2014 की स्वीकृति के अनुसार  कंपनी निदेशक (director) के रिश्तेदारों से असुरक्षित ऋण (unsecured loan) और जमा (deposit) प्राप्त कर सकती है अगर यह केवल उधार ली गई राशि नहीं है लेकिन उपहार के रूप में। इसके अलावा  ऐसे असुरक्षित ऋण वापस किए जाने चाहिए । हालांकि  जो कंपनियां पहले से स्वीकार किए गए ऋण को वापस करने में विफल रहती हैं  वे कंपनी अधिनियम 2013 की धारा 73 से 76 के प्रावधानों के तहत दंडनीय है और अभियोजन की कार्यवाही के रूप में सामना (Face) कर सकते हैं। 

कानूनी तौर पर पूरा कंप्लीट (Complete)

निदेशक मंडल के साथ बैठक

पहली बैठक कंपनी के निगमन (Incorporation) के तीस दिनों के भीतर होनी चाहिए। बोर्ड की बैठक की सूचना कंपनी के प्रत्येक निदेशक (director) को आमने-सामने या ईमेल के माध्यम से मिलने से सात दिन पहले दी जानी चाहिए।

लेखा परीक्षक की नियुक्ति (Appointment of auditor)

कंपनी शुरू करने की तारीख से एक महीने के भीतर एक ऑडिटर नियुक्त किया जाना चाहिए। प्रत्येक एकाउंटेंट को लेखा (Accounts) तैयार करना चाहिए और अंत में ऑडिटर की सहमति प्राप्त करनी चाहिए और ऑडिट रिपोर्ट प्रदान करनी चाहिए | जो कि एक होनी चाहिए। ऐसा करने में विफलता (Failure) के कारण महान दंड (Great punishment) होगा।

निदेशकों की रिपोर्ट (Directors report)

सबसे महत्वपूर्ण निर्देशकों की रिपोर्ट (Directors report) कंपनी अधिनियम की धारा 134 के तहत उल्लिखित होनी चाहिए | जो वर्ष के दौरान परिचालन (Operating) , शुद्ध लाभ , लाभांश घोषणा (Dividend declaration) आदि शामिल (Include) है। कंपनी को व्यवसाय शुरू करने के 60 दिनों के भीतर शेयर प्रमाणपत्र (stock certificate) भी जारी करना (stock certificate) होता है।

फाइलिंग एनुअल रिटर्न

यह भी अनिवार्य है कि प्रत्येक कंपनी को http://www.mca.gov.in/ पर उपलब्ध ई-फॉर्म में सालाना (Yearly) आम बैठक के 60 दिनों के भीतर कंपनियों के रजिस्टर के साथ अपना वार्षिक रिटर्न दाखिल (Annual return filing) करना होता है निदेशकों में से कम से कम एक द्वारा  जिसे डिजिटल हस्ताक्षरित (Signed) करना होता है। 

निष्कर्ष ( conclusion)

इसलिए इसे संक्षेप में कहें , जैसा कि कहा जाता है  , रोकथाम इलाज से बेहतर है (prevention is better than cure) कंपनियों को उन मूल अनुपालनों के बारे में पता होना चाहिए| जो पूरे होने हैं और सभी अनुपालनों (Compliance) को पूरा करने के लिए आवश्यक कदम उठाने चाहिए | ताकि (so that ) अनावश्यक त्रुटियां से बचा जा सकें ।

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